आँखों को रोशनी, दिलों को सुकून देने वाला सेवा अभियान स्व. लक्ष्मण कुमावत की प्रथम पुण्य स्मृति में ग्रामीण अंचल के लिए आशा की किरण बना निःशुल्क नेत्र शिविर

BHILWARA
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शाहपुरा@(किशन वैष्णव)किसी अपने की स्मृति को यदि मानव सेवा से जोड़ा जाए, तो वह स्मृति अमर हो जाती है। स्व. लक्ष्मण कुमावत की प्रथम पुण्य स्मृति में स्वाभिमान ग्राम विकास नवयुवक मंडल द्वारा ग्राम सारांश में आयोजित निःशुल्क नेत्र जाँच एवं परामर्श शिविर ने यही संदेश दिया। यह शिविर केवल एक चिकित्सा आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचल के सैकड़ों परिवारों के जीवन में रोशनी लौटाने का सशक्त प्रयास बना।



इस विशाल शिविर में पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, भीलों का बेदला (उदयपुर) की अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ टीम ने निःस्वार्थ भाव से सेवाएँ प्रदान कीं। सुबह से ही शिविर स्थल पर मरीजों की कतारें लग गईं। वृद्ध, महिलाएँ, युवा और बच्चे—सभी में एक ही उम्मीद थी—फिर से साफ़ देखने की।



शिविर के दौरान कुल 136 मरीजों की निःशुल्क नेत्र जाँच एवं परामर्श किया गया। जाँच में 32 मरीजों में मोतियाबिंद, नाखूना एवं काला पानी जैसी गंभीर नेत्र बीमारियाँ पाई गईं। इन मरीजों को ऑपरेशन हेतु चयनित कर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ अगले दिन सभी के निःशुल्क ऑपरेशन किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त दृष्टि दोष से पीड़ित 37 मरीजों को नंबर वाले चश्मे निःशुल्क वितरित किए गए, जिससे कई लोगों के चेहरों पर तत्काल राहत और संतोष की मुस्कान देखने को मिली।



शिविर का शुभारंभ ग्राम के वरिष्ठजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्वाभिमान ग्राम विकास नवयुवक मंडल के पदाधिकारियों द्वारा स्व. लक्ष्मण कुमावत के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने स्व. लक्ष्मण कुमावत के सरल स्वभाव, सामाजिक सहयोग एवं मानवीय संवेदनाओं को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन से एक दिन पूर्व रात्रि में उनकी स्मृति में आयोजित संगीतमय सुंदरकांड पाठ ने पूरे गांव को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।



चिकित्सकों ने मरीजों को नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए नियमित जाँच, समय पर इलाज और सावधानियों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि समय रहते उपचार मिलने से अंधत्व जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। शिविर में आवश्यक दवाइयाँ भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

आसपास के गांवों से आए मरीजों ने कहा कि ऐसे शिविर उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। आर्थिक तंगी और दूरी के कारण जो लोग इलाज से वंचित रह जाते हैं, उन्हें इस प्रकार के आयोजनों से नया जीवन मिलता है। कई वृद्ध मरीज भावुक होकर बोले—“अब हम अपने पोते-पोतियों को साफ़ देख पाएंगे।”

स्वाभिमान ग्राम विकास नवयुवक मंडल के सदस्यों ने बताया कि स्व. लक्ष्मण कुमावत की स्मृति को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रखते हुए उसे मानवता की सेवा में परिवर्तित करना ही इस आयोजन का उद्देश्य रहा। मंडल ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सरोकार से जुड़े ऐसे जनहितकारी कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।