मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना को लेकर उठे सवाल निजी दुग्ध उत्पादक किसानों को भी योजना में शामिल करने की मांग

BHILWARA
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भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना को लेकर प्रदेश के दुग्ध उत्पादक किसानों के बीच नई बहस छिड़ गई है। गोकुल डेयरी, भीलवाड़ा के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं दुग्ध विशेषज्ञ अशोक चोबे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस योजना का लाभ केवल सहकारी दुग्ध उत्पादक किसानों तक सीमित रखने पर सवाल उठाए हैं और इसे सभी किसानों के लिए लागू करने की मांग की है।
अशोक चैबे ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना यदि वास्तव में हर किसान की आर्थिक उन्नति के लिए बनाई गई है, तो फिर इसका लाभ केवल सहकारी दुग्ध समितियों से जुड़े किसानों को ही क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि राजस्थान को देश में दूध उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंचाने में निजी क्षेत्र के किसानों की भूमिका कहीं अधिक रही है। उनके अनुसार, सहकारी क्षेत्र से जुड़े किसानों का योगदान लगभग 33 लाख लीटर प्रतिदिन है, जबकि निजी क्षेत्र से जुड़े लाखों किसान प्रतिदिन करीब 40 लाख लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं।


पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के दुग्ध उत्पादन में निजी क्षेत्र की यह बड़ी हिस्सेदारी होने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना के दायरे से बाहर रखा जाना न्यायसंगत नहीं है। चैबे ने यह भी कहा कि यदि हर किसान को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलेगा, तभी राजस्थान समग्र रूप से आगे बढ़ सकेगा। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होगी तथा पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि योजना को केवल सहकारी संस्थाओं तक सीमित रखा गया, तो राजस्थान में निजी दुग्ध संगठनों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। इससे न केवल निजी डेयरियों के बंद होने की नौबत आएगी, बल्कि उनसे जुड़े लाखों किसानों की आजीविका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
अशोक चैबे ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना को सहकारी और निजी, दोनों ही क्षेत्रों के दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए समान रूप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में दुग्ध उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा, किसानों की आय में इजाफा होगा तथा पशुपालन क्षेत्र में संतुलित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
गौरतलब है कि अशोक चैबे उदयपुर कृषि विश्वविद्यालय से डेयरी टेक्नोलॉजी में बी.टेक (1993) हैं और लंबे समय से दुग्ध उद्योग से जुड़े हुए हैं। उनके इस पत्र के बाद दुग्ध उत्पादक किसानों और डेयरी उद्योग से जुड़े संगठनों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और योजना में किसी प्रकार का विस्तार किया जाता है या नहीं।