बिजोलिया। उपखंड क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने और आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ऊपरमाल पर्यावरण समिति के उपाध्यक्ष शक्ति नारायण शर्मा ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भू-जल मंत्री को पत्र लिखकर उपखंड मुख्यालय पर जलदाय विभाग का सहायक अभियंता (AEN) कार्यालय खोलने की मांग की है।

पत्र में शर्मा ने बताया कि उपखंड में लगभग 130 गांव शामिल हैं। उपखंड मुख्यालय की आबादी करीब 40 हजार तथा पूरे उपखंड की जनसंख्या लगभग 1 लाख 30 हजार है। वर्तमान में बिजोलिया नगर में करीब 3500 नल कनेक्शन हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग जल कनेक्शन संचालित हैं।
शर्मा ने बताया कि बिजोलिया में उपखंड कार्यालय, तहसील कार्यालय, पंचायत समिति, नगर पालिका, विद्युत विभाग का सहायक अभियंता कार्यालय, उप जिला चिकित्सालय, मुंसिफ कोर्ट तथा राजकीय महाविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान पहले से संचालित हैं। इसके अलावा बिजोलिया ऐतिहासिक क्षेत्र होने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर स्थित है।
शर्मा ने बताया कि मुख्यालय में कुल चार विभागीय परिसर हैं, जिनमें एक कनिष्ठ अभियंता कार्यालय संचालित है। परियोजना खंड द्वारा नया कनिष्ठ अभियंता कार्यालय भवन तैयार किया गया है, जिसमें ब्लॉक स्तरीय प्रयोगशाला भी संचालित की जानी है। इसके अतिरिक्त परियोजना खंड के पंप हाउस परिसर में एक अन्य भवन उपलब्ध है, जो AEN कार्यालय संचालन के लिए पूरी तरह उपयुक्त है।
उन्होंने यह भी बताया कि बिजोलिया उपखंड में मंडोल बांध, पचानपुरा बांध, मोतीपुरा बांध एवं झुंड का नाका बांध सहित चार बड़े बांध हैं, जिनसे पेयजल आपूर्ति और सिंचाई की जाती है। क्षेत्र में 20 लाख लीटर क्षमता का फिल्टर प्लांट स्थापित है तथा चंबल परियोजना के तहत सभी राजस्व गांवों को चंबल नदी के जल से जोड़ा गया है।
बिजोलिया मुख्यालय में प्रतिदिन लगभग 25 लाख लीटर पानी की आवश्यकता होती है, इसके बावजूद यहां सहायक अभियंता कार्यालय नहीं है, जबकि भीलवाड़ा जिले के अन्य क्षेत्रों जहां क्षेत्रफल और कनेक्शन कम हैं वहां AEN कार्यालय पहले से संचालित हैं।

शर्मा ने पत्र में यह भी बताया कि बिजोलिया में AEN कार्यालय खोलने से सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, क्योंकि आवश्यक भवन और आधारभूत ढांचा पहले से उपलब्ध है।
उन्होंने मांग की कि बिजोलिया में शीघ्र सहायक अभियंता कार्यालय खोला जाए, जिससे जलदाय विभाग से जुड़े मामलों का समाधान स्थानीय स्तर पर हो सके और क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।














