राम ही सत्य, सत्य ही संस्कृति है, विकृतिवाद छोड़ो, संस्कृतिवाद अपनाओ” : आचार्यश्री रामदयालजी महाराज
महाप्रभु रामचरण जी महाराज का 307वां प्राकट्य महोत्सव रविवार को शाहपुरा में होगा निकलेगी शोभायात्रा
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
अखिल भारतीय विजयवर्गीय मेवाड़ महासभा के तत्वावधान में रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरण जी महाराज का 307वां प्राकट्य महोत्सव श्री रामनिवास धाम, शाहपुरा में 1 फरवरी रविवार 2026 को श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक चेतना के साथ मनाया जाएगा। इससे पूर्व शनिवार को रामनिवास धाम में समाज के युवक-युवतियों का परिचय अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेशभर से समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ रामस्नेही संप्रदाय के आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने महाप्रभु रामचरण जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। वातावरण “राम-राम” की गूंज और भक्ति रस से सराबोर हो उठा। सम्मेलन की शुरुआत में महामंत्री श्यामसुंदर विजयवर्गीय ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए आयोजन की उपादेयता पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष घनश्याम विजयवर्गीय ने महाप्रभु स्वामी रामचरण जी महाराज के जीवन चरित्र का स्मरण कर समाजजनों से उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा, “रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक आद्याचार्य महाप्रभु स्वामी रामचरण जी महाराज ने जो ‘राम नाम’ का महामंत्र दिया, वह आज भी उतना ही प्रभावी और कारगर है। राम नाम सुमिरन और साधना का वही तारक मंत्र विजयवर्गीय समाज और रामस्नेही संप्रदाय की आत्मा है।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “राम ही सत्य है और सत्य ही संस्कृति है। आज आवश्यकता है कि समाज विकृतिवाद से ऊपर उठकर संस्कृतिवाद को अपनाए। जब व्यक्ति राम नाम को जीवन में उतार लेता है, तब समाज स्वतः शुद्ध और सशक्त बन जाता है।”
आचार्यश्री ने शाहपुरा धाम में इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि विजयवर्गीय समाज ने यहां आयोजन कर समूचे समाज को महाप्रभु के सानिध्य से जोड़ने का महान कार्य किया है। उनके प्रवचन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्ममंथन और आत्मशुद्धि की राह दिखा दी।
इस अवसर पर संत नरपतराम महाराज, संत अमृतराम महाराज एवं संत रामनारायण देवास ने भी विचार रखे और महाप्रभु रामचरण जी महाराज की परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया।
रामचरण जी महाराज जयंती संयोजक कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि सम्मेलन के पहले दिन 1800 से अधिक लोगों का पंजीयन हुआ है और रविवार को भी समाजजनों का आगमन जारी रहेगा। युवक-युवती परिचय अधिवेशन में 500 से अधिक युवक-युवतियों का पंजीयन हुआ, जिनका परिचय डिजिटल माध्यम से समाज को उपलब्ध कराया गया। हालांकि युवतियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, फिर भी समाज में उत्साह और सहभागिता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
मेवाड़ महासभा अध्यक्ष घनश्याम विजयवर्गीय एवं महामंत्री श्यामसुंदर विजयवर्गीय की अगुवाई में रामनिवास धाम को भव्य रूप से सजाया गया है। रोशनी, पताकाएं और पुष्प सज्जा पूरे धाम को आध्यात्मिक नगरी में परिवर्तित कर रही हैं।

कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि वरिष्ठ संत रामनारायण देवास एवं कार्यवाहक भंडारी संत जगवल्लभ राम की प्रेरणा से दो दिवसीय आयोजन का शुभारंभ हुआ। शनिवार को युवक-युवती परिचय अधिवेशन हुआ तथा रात्रि में आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के सानिध्य में भव्य जागरण आयोजित किया गया।
भव्य शोभायात्रा बनेगी आकर्षण का केंद्र-
1 फरवरी रविवार को राममेडिया से 398 भोग थाल के साथ भव्य शोभायात्रा हाथी-घोड़े, बैंड-बाजे, छत्र-चंवर और शाही लवाजमे के साथ रवाना होगी। नाचते-गाते श्रद्धालु शोभायात्रा के साथ श्री रामनिवास धाम पहुंचेंगे, जहां समापन पर विशाल धर्मसभा होगी और आचार्यश्री के आशीर्वचन होंगे। उल्लेखनीय है कि रामस्नेही संप्रदाय की मुख्य पीठ शाहपुरा स्थित श्री रामनिवास धाम ही है, जहां से महाप्रभु रामचरण जी महाराज की विचारधारा आज भी पूरे देश में प्रवाहित हो रही है।














