शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
विधानसभा क्षेत्र शाहपुरा के विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने मंगलवार को सदन में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की रामपुरा आगूचा माइंस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अधिक गहराई में किए जा रहे भूमिगत खनन और उसमें इस्तेमाल हो रहे केमिकल्स ने पूरे शाहपुरा क्षेत्र के भूमिगत जल को जहरीला बना दिया है। स्थिति यह है कि अब कई गांवों में पानी पीने लायक नहीं बचा और डंपिंग यार्ड से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी किसानों के खेतों में छोड़े जाने से फसलें चौपट हो रही हैं।
विधायक बैरवा ने सदन में दो टूक कहा “पर्यावरण के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है और जमीन के नीचे का जीवनदायी जल ज़हर बन चुका है। यह सिर्फ प्रदूषण नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सेहत और किसानों की रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला है।” उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्र के पानी की वैज्ञानिक जांच करवाई जाए, जल सुधार के ठोस कदम उठाए जाएं और माइंस प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिन किसानों की जमीन और फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें तुरंत अनुतोष व मुआवजा दिलाया जाए।
बैठक में उठे इस मुद्दे ने पूरे शाहपुरा क्षेत्र की पीड़ा को राजधानी तक पहुंचा दिया। उल्लेखनीय है कि रामपुरा आगूचा माइंस के कैचमेंट एरिया में शाहपुरा पंचायत समिति क्षेत्र के कई गांव प्रभावित हो रहे हैं। इन गांवों में भूजल का रंग, स्वाद और गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कुओं और हैंडपंप से निकलने वाला पानी बदबूदार हो चुका है, जिससे पेट की बीमारियां और त्वचा रोग बढ़ रहे हैं।

दो वर्ष पूर्व इसी समस्या को लेकर बड़ा आंदोलन भी हुआ था। उस समय वार्ता में माइंस प्रबंधन और प्रशासन के बीच कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन तय शर्तों के अनुसार आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। न जल शोधन की व्यवस्था की गई, न डंपिंग यार्ड से बहने वाले रासायनिक पानी को रोकने के ठोस इंतजाम हुए। परिणाम यह कि समस्या और विकराल रूप ले चुकी है।
किसानों का दर्द अब गुस्से में बदल रहा है। खेतों में केमिकलयुक्त पानी जाने से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और फसलें समय से पहले सूख रही हैं। कई किसान मजबूरी में खेती छोड़ने की कगार पर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी मुनाफा कमा रही है, लेकिन प्रदूषण का ज़हर गांवों को पीना पड़ रहा है।
विधानसभा में इस मुद्दे के उठते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई। विपक्ष ने इसे सरकार की पर्यावरणीय विफलता बताया, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया। लेकिन शाहपुरा की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है।


क्षेत्र के नागरिकों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र में बड़ा जन आंदोलन खड़ा होगा। उन्होंने साफ कहा“पानी बचाना है तो ज़हर फैलाने वालों पर लगाम कसनी होगी।”
अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस ज़हरीले संकट को गंभीरता से लेकर तुरंत कदम उठाएगी, या फिर शाहपुरा के गांव इसी तरह दूषित पानी पीने को मजबूर रहेंगे? विधानसभा में उठा यह मुद्दा सिर्फ एक सवाल नहीं, बल्कि शाहपुरा के भविष्य की लड़ाई बन चुका है।













