बिजौलिया।
उपखंड मुख्यालय का उप जिला चिकित्सालय का पुराना भवन अब जानलेवा बन चुका है। बीते दो रविवार रात में हुई भारी बारिश के बाद भवन का ऊपरी हिस्सा अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। यहां तक कि एक दीवार अब महज़ एक ईंट के सहारे खड़ी है, जो कभी भी गिर सकती है। इसके बावजूद इस पर न तो कोई कार्यवाही हो रही है, न ही प्रशासन की कोई ठोस पहल सामने आई है।
2021 से फाइल अटकी, अब हादसे की आशंका
जानकारी के अनुसार, इस जर्जर भवन को लेकर चिकित्सा विभाग ने वर्ष 2021 में ही सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) को रिपोर्ट भेज दी थी और भवन को कंडम घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। लेकिन तब से लेकर आज तक यह फाइल सिर्फ कागजों में घूम रही है। परिणामस्वरूप अब ये भवन न केवल मरीजों और स्टाफ बल्कि आसपास रह रहे चिकित्सकों के परिवारों के लिए भी खतरे का कारण बन गया है।

हर बारिश बनती है आफत
बारिश के दिनों में यहाँ कि स्थिति और भयावह हो जाती है। छत से प्लास्टर और रोड़ी लगातार गिरती रहती है। पहली मंजिल के लेंटर की हालत इतनी खराब है कि वह कभी भी खिसककर नीचे गिर सकता है। सफाई के अभाव में दीवारों पर पेड़ उग आए हैं, जिनकी जड़ें धीरे-धीरे भवन को कमजोर कर रही हैं।
लोगों ने आवाजाही बंद की, फिर भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोग और मरीज अब इस भवन में जाना बंद कर चुके हैं। कई बार अस्पताल प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द कार्रवाई कर इस भवन को हटवाए, ताकि कोई बड़ा हादसा होने से पहले स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सके।
इनका कहना हैं
“पुराने भवन की जर्जर हालत को लेकर 2021 में ही सार्वजनिक निर्माण विभाग को सूचित कर दिया गया था। विभाग ने भवन को कंडम घोषित कर दिया है, लेकिन निदेशालय से अनुमति नहीं मिलने के कारण अभी तक इसे गिराया नहीं जा सका है। फिलहाल लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवाजाही बंद कर दी गई है। जैसे ही अनुमति मिलती है, भवन को हटाया जाएगा।”
डॉ. अंसार खान, चिकित्सा अधिकारी, उप जिला चिकित्सालय बिजौलिया
