फोटो साभार । प्रेम शंकर धाकड़
कंटेंट । कपिल श्याम विजय / नरेश धाकड़
भीलवाड़ा / बिजोलिया । आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अरावली पर्वत श्रृंखला के मध्य ऐरू नदी किनारे स्थित तिलस्वां महादेव मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ने जा रहा है। लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए यहां पहुंचेंगे। पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है और सात दिवसीय मेले की भव्य तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
देश के सबसे छोटे शिवलिंगों में शामिल, तिल के समान स्वरूप
तिलस्वां महादेव की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग है, जो आकार में ‘तिल’ के समान माना जाता है। यही कारण है कि यह धाम ‘तिलस्वां’ नाम से विख्यात हुआ। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।
महाशिवरात्रि पर मंदिर 24 घंटे दर्शनार्थ खुला रहेगा, जबकि सामान्य दिनों में सुबह 4 बजे मंगला आरती से रात्रि 9 बजे तक दर्शन होते हैं।

पवित्र कुंड और ‘केसर गार’ की अनूठी आस्था
मंदिर के सामने स्थित विशाल गोलाकार कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। लोकमान्यता है कि इस पवित्र जल में स्नान करने और यहां की मिट्टी जिसे स्थानीय भाषा में ‘केसर गार’ कहा जाता हैका लेपन करने से असाध्य रोगों में राहत मिलती है।
रोग निवारण की आस्था लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को यहां ‘तिलस्वां महादेव के कैदी’ कहा जाता है। वे सुबह-शाम आरती में शामिल होते हैं और कुंड की परिक्रमा कर भोलेनाथ से आरोग्यता की कामना करते हैं।


10वीं-12वीं सदी की ऐतिहासिक विरासत
इतिहास के अनुसार मंदिर की स्थापना 10वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य मानी जाती है। जनश्रुति के अनुसार मेनाल के राजा हवन को कुष्ठ रोग होने पर एक सिद्ध योगी ने यहां के कुंड में स्नान करने की सलाह दी थी। रोग से मुक्ति मिलने पर राजा ने यहां भव्य शिव मंदिर का निर्माण करवाया।
मुख्य मंदिर के दोनों ओर गणेश एवं अन्नपूर्णा के मंदिर, विशाल सभा मंडप और तीन भव्य सिंहद्वार इसकी स्थापत्य कला को विशेष बनाते हैं।
सात दिवसीय मेले में सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम
महाशिवरात्रि मेले को लेकर ‘श्री तिलस्वां महादेव मंदिर ट्रस्ट’ ने व्यापक प्रबंध किए हैं। ट्रस्ट के संरक्षक इन्जी. कन्हैयालाल धाकड़, अध्यक्ष रमेशचंद्र अहीर और सचिव मांगीलाल धाकड़ के नेतृत्व में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और आवास की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

विभिन्न समाजों की धर्मशालाएं आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं। प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
भजन, रात्रि जागरण और विशेष श्रृंगार
आज रात्रि में विशेष पूजन, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण का आयोजन होगा। पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहेगा। सावन, सोमवार, पूर्णिमा और अमावस्या को भी यहां भारी भीड़ रहती है, लेकिन महाशिवरात्रि का उत्सव सबसे भव्य और दिव्य माना जाता है।




