*धर्म हमारे जीवन का प्राण, धर्म निरपेक्ष नहीं धर्म सापेक्ष बने- डॉ.पाराशर*
*सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह में विधानसभा अध्यक्ष रविवार को होंगे शामिल*
भीलवाड़ा,मूलचन्द पेसवानी
हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर भीलवाड़ा इन दिनों सनातन संस्कृति के विभिन्न रूपों को एक साथ प्रकट करने वाला केन्द्र बना हुआ है। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज के मार्गदर्शन में आठ दिवसीय सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के तहत एक तरफ श्री अष्टोतर शत (108) भागवत मूल पाठ हो रहा है


तो एक तरफ चारों वेद के मूल पाठ का पारायण होकर वेद वाणी गूंज रही है। इसके साथ ही काशी के यज्ञाचार्य कामेश्वरनाथ तिवारी के सानिध्य में पंचकुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ में आहुतियां देने के साथ वैदिक अग्नि अनुष्ठान पूरे वातावरण को पवित्र व पावन बना रहा है।

शतचण्डी, अखण्ड श्रीमद् भगवतगीता पाठ, श्री रामचरितमानस पाठ, श्रीचंद सिद्धांत सागर पाठ, अखण्ड श्री रामनाम संकीर्तन भी अनवरत जारी होकर वातावरण को सनातन संस्कृति के रंगों से सराबोर कर रहे है। महोत्सव के तहत श्रीमद भागवत महापुराण कथा वाचन तीसरे दिन शनिवार को श्रीधाम वृन्दावन के कथा व्यास डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर ने सती चरित्र व धु्रव चरित्र प्रसंग का वाचन किया। कथा में डॉ. पाराशर ने कहा कि धर्म के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हमे धर्म निरपेक्ष नहीं धर्म सापेक्ष बनने की जरूरत है। महात्मा विदुर ओर युधिष्ठर दोनों धर्म के अवतार थे पर विदुर के जाने से कौरव धर्म निरपेक्ष हो गए थे जो विनाश का कारण बना। पांडवों के साथ सदा धर्म रहा। जहां धर्म होता है भगवान वहीं होते है। कितना भी कमजोर होने पर भी धर्म को साथ रखने वाला कभी हार नहीं सकता। उन्होंने कहा कि माया की प्रबलता ज्ञान ओर चित्त पर पर्दा डाल देती है। माधव का जो भक्त बन जाता है माया उसकी दासी होती है। माया से बचना है तो भगवान के शरणागत हो जाए। डॉ. पाराशर ने कहा कि संसार का सुख भ्रम मात्र है संसार में सब एक दूसरे को सुखी समझते है लेकिन सुखी कोई नहीं होता। असली सुख बाहरी दुनिया में नहीं बल्कि हमारे भीतर है उसकी अनुभूति करने के लिए अर्न्तमुखी बनना होगा। इसके बिना कोई जीव सुखी नहीं हो सकता। संसार में जितनी सुविधाएं बढ़ी उतनी ही अशांति भी बढ़ी है। बर्हिमुखी होने से हम भौतिक संसाधनों में सुख तलाश रहे जबकि आत्मा के भीतर झांके बिना मन की प्यास नहीं बुझ सकती। उन्होंने मनुस्मृति की चर्चा करते हुए कहा कि मनु महाराज ने इसमें जीवन का संविधान बताया है, जो मनु स्मृति को गाली देते है वह अपने पूर्वजों को गाली दे रहे है। हमारा मन ही मुक्ति व बंधन का कारण होता है। मन भगवान में लग जाए तो मुक्ति ओर विषयों में लग जाए तो बंधन बन जाता है। भजन मन को भगवान से जोड़ता है। परमतत्व ज्ञानी से जुड़े जाने पर भी हमारा परमात्मा से जुड़ाव हो सकता है। महात्मा वहीं होता है जो मान ओर अपमान दोनों में समभाव रखता है। कथा में विभिन्न भजनों के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर झुमते रहे। कथा के तीसरे दिवस के विश्राम पर व्यास पीठ की आरती करने वालों में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज,
महंत श्यामसुन्दर दास महाराज, महंत सुभाष शाह जम्मू, महंत प्रकाशमुनी हरिद्वार, महंत दामोदर शरण हरिद्वार, महंत स्वरुपदास उदासीन अजमेर, महंत हनुमान राम उदासीन पुष्कर, महंत मोहन दास इंदौर, हाथीभाटा आश्रम के महन्त संतदास महाराज, हनुमान टेकरी के महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा, निम्बार्क आश्रम के महन्त मोहनशरण शास्त्री, महन्त रामदास रामायणी ट्रांसपोर्टनगर, महंत भूमानंद महाराज पंजाब,
संत हरेराम दास जम्मू, संत राघवानंद दास उत्तरकाशी, संत ओम दास, संत हंसदास रीवा, साध्वी गुरुपदमा भीलवाड़ा, संत स्वरूप दास रीवा, पंचमुखी बालाजी रीको के पुजारी मुरारी पांडे शामिल थे। इनके साथ भीलवाड़ा के विभिन्न समाजों एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, सनातन सेवा समिति एवं हंसगंगा हरिशेवा भक्त मण्डल के पदाधिकारी एवं सदस्यों व श्रद्धालुओं ने आरती की। श्रीमद् भागवत महापुराण कथा 25 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक होगी। कथा में चौथे दिन रविवार को राम कथा व नंद महोत्सव प्रसंग का वाचन होगा।


*काशी ओर वृन्दावन से आए विद्धान करा रहे वेद पाठ ओर अनुष्ठान*
सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के तहत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न कराने के लिए काशी, वृन्दावन, वाराणसी सहित विभिन्न स्थानों से 180 से अधिक विद्धान हरिशेवा आश्रम सनातन मंदिर आए हुए है। श्री अष्टोतर शत (108) भागवत मूल पाठ वृन्दावन से आए पीठाचार्य श्रीराम कुमार मुद्गल के निर्देशन में हो रहा है। काशी के यज्ञाचार्य कामेश्वरनाथ तिवारी के सानिध्य में विद्धानों द्वारा यज्ञ सम्पादन एवं चारों वेद के मूल पाठ का पारायण हो रहा है। इन अनुष्ठानों के माध्यम से विश्व कल्याण एवं सर्व मंगल की कामना की जा रही है। श्रीधाम वृन्दावन के रसिकाचार्य कुंजबिहारी शर्मा श्री निकुंज बिहारी रासलीला मण्डल के लीलाकारों द्वारा रासलीला का आयोजन भी प्रतिदिन शाम 7 बजे से हो रहा है। इसके तहत भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। महोत्सव में प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से काशी की तर्ज पर गंगा आरती का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ किया जा रहा है। सनातन मंगल महोत्सव में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंच रहे है।
*विधासभा अध्यक्ष देवनानी आज रविवार को आएंगे*
सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह में 22 अप्रेल रविवार को राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी शामिल होंगे। देवनानी दोपहर 3 बजे हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर पहुचेंगे। श्रीमद् भागवत कथा पांडाल में सुबह 10:40 बजे महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में श्रद्धालुगण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘मन की बात’ के 131वें संस्करण का श्रवण करेंगे।

