कल्याणपुरा की टूटी लाइन 6 माह बाद भी दुरस्त नहीं,गर्मी की दस्तक से पहले ही खामोर अंचल में पेयजल संकट गहराया।

BHILWARA
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पंप हाउस का डेढ़ लाख लीटर स्टोरेज भी नाकाफी, 7-8 दिन में हो रही जलापूर्ति,कर्मचारियों द्वारा अपर्याप्त सप्लाई कर लीपापोती करते हैं।


खामोर के सातों  खेड़ो के प्यासे हलक, ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश..कल्याणपुरा के वाशिंदे 6 माह से पानी के लिए तरस रहे।


खामोर@ ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत से पहले ही खामोर क्षेत्र में पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। अभी तापमान ने पूरी तरह से तेवर नहीं दिखाए हैं, लेकिन जलापूर्ति व्यवस्था पहले ही जवाब देती नजर आ रही है। खामोर सहित ग्राम कल्याणपुरा, बहका खेड़ा, रामपुरा, इंदिरा कॉलोनी और करेशिया का खेड़ा में जल संकट गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि कई बस्तियों में 7 से 8 दिन के अंतराल में जलापूर्ति हो रही है, जिससे आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।ग्रामीणों की पीड़ा अब शब्दों में बयां होने लगी है। सुबह से ही महिलाएं खाली मटके और बर्तनों के साथ इस उम्मीद में बैठी रहती हैं कि कब नल में पानी आए और वे अपने घर की टंकियां भर सकें। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता। बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। जिन परिवारों के पास निजी साधन नहीं हैं, उन्हें दूर-दराज के हैंडपंपों या महंगे टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो गई है।


ग्रामीणों का आरोप है कि जलदाय विभाग की लापरवाही और स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की उदासीनता के कारण समस्या विकराल होती जा रही है। शिकायतें करने पर कभी पाइपलाइन में लीकेज का हवाला दिया जाता है तो कभी चंबल परियोजना से सप्लाई कम आने की बात कह दी जाती है। लेकिन धरातल पर न तो लीकेज का स्थायी समाधान नजर आता है और न ही सप्लाई में कोई नियमितता दिखाई देती है।
क्षेत्र में चंबल पंप हाउस स्थापित है और लगभग डेढ़ लाख लीटर क्षमता का स्टोरेज टैंक भी बना हुआ है, जिसका उद्देश्य नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित करना था। परंतु मौजूदा हालात इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इतना बड़ा स्टोरेज उपलब्ध है तो फिर जल संकट क्यों? क्या स्टोरेज क्षमता कम पड़ रही है, या फिर टंकियों को समय पर भरा ही नहीं जा रहा? यह आशंका भी जताई जा रही है कि जलापूर्ति केवल औपचारिकता निभाने के लिए कुछ समय के लिए छोड़ दी जाती है, जिससे विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी होने का दावा कर सके, लेकिन वास्तविकता में लोगों की टंकियां आधी-अधूरी ही रह जाती हैं।


ग्राम कल्याणपुरा, बहका खेड़ा, रामपुरा, इंदिरा कॉलोनी और करेशिया का खेड़ा के निवासियों का कहना है कि यदि अभी, जब गर्मी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई है, यह स्थिति है तो मई-जून की भीषण गर्मी में हालात भयावह हो सकते हैं। लोग आशंकित हैं कि आने वाले दिनों में पानी के लिए संघर्ष और बढ़ेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि चंबल पंप हाउस की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, स्टोरेज टैंक की वास्तविक स्थिति और सप्लाई शेड्यूल सार्वजनिक किया जाए तथा जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी प्रभावित गांवों और कॉलोनियों में नियमित, पर्याप्त और पारदर्शी जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।
पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता में अनियमितता ने क्षेत्र में असंतोष को जन्म दे दिया है। यदि समय रहते व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो यह पेयजल संकट जनआंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल खामोर अंचल के लोग आसमान की ओर नहीं, बल्कि नलों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि कब उनकी प्यास बुझाने के लिए पानी नियमित रूप से पहुंचे।




विभाग के  एक्सईएन वादों की टंकी खाली:10 दिन बाद भी शुरू नहीं हुआ कार्य, कल्याणपुरा में 40 घर प्यासे

कल्याणपुरा में पिछले छह माह से ठप पड़ी जलापूर्ति को लेकर ग्रामीणों की उम्मीदें एक बार फिर टूटती नजर आ रही हैं। करीब 10 दिन पहले जलदाय विभाग के एक्सईएन मयंक शर्मा ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि 7 से 10 दिन के भीतर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को दुरुस्त करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन तय समय गुजर जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि एमडीआर सड़क निर्माण के दौरान टूटी पाइप लाइन के कारण लगभग 40 घरों में पिछले छह माह से पानी की सप्लाई बंद है। कई बार शिकायत करने और अधिकारियों से मिलने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। एक्सईएन द्वारा दिए गए आश्वासन से लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब राहत मिलेगी, लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी न तो मशीनरी पहुंची और न ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ।
इन 40 घरों के परिवार रोजाना पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में ही पेयजल संकट ने कल्याणपुरा के इन 40 घरों की जिंदगी कठिन बना दी है और अब उन्हें केवल वादों नहीं, ठोस कार्रवाई का इंतजार है।