चीड़ खेड़ा में जर्जर पुलिया बनी जानलेवा, फिर हुआ हादसा, ग्रामीणों में आक्रोश

BHILWARA
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चीड़ खेड़ा में जर्जर पुलिया बनी जानलेवा, फिर हुआ हादसा, ग्रामीणों में आक्रोश

भीलवाड़ा।
भीलवाड़ा जिले के सहाड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत चीड़ खेड़ा इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रही है। बाड़ा स्थित हनुमान जी मंदिर के पास बनी पुलिया और सड़क की बदहाल स्थिति अब ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। सोमवार रात करीब 8 बजे यहां एक बार फिर सड़क हादसा हो गया, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, घटनास्थल पर पुलिया लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी है। पुलिया के ऊपर और आसपास की सड़क पूरी तरह उखड़ी हुई है, जहां बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। वहीं सड़क किनारे मिट्टी कटाव के कारण गहरी खाई बन गई है, जो वाहनों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।

विशेषकर रात के समय यह मार्ग अत्यधिक जोखिम भरा हो जाता है, क्योंकि यहां न तो पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था है और न ही कोई चेतावनी संकेत लगाए गए हैं। ऐसे में वाहन चालकों को गड्ढों और खाई का अंदाजा नहीं लग पाता और दुर्घटनाएं हो रही हैं।

सोमवार रात हुए हादसे में एक वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि वाहन चालक नारायण खेड़ा गांव का निवासी है। इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि वाहन को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल संयोग था कि इस बार बड़ा हादसा टल गया।

ग्रामीणों के अनुसार, इस स्थान पर पहले भी दो से तीन बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हर बार संबंधित विभाग को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसको लेकर ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

एक ग्रामीण ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला है, जमीनी स्तर पर कोई सुधार कार्य नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिया और सड़क की मरम्मत कर दी जाती, तो इन हादसों को रोका जा सकता था।

लगातार हो रही दुर्घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिया के पुनर्निर्माण, सड़क के गड्ढों की मरम्मत, सड़क किनारे बनी खाई की सुरक्षा, चेतावनी बोर्ड व बैरिकेडिंग तथा रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि चीड़ खेड़ा का यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का उदाहरण बनता जा रहा है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।