किसानों का रकबा घटाना न्यायोचित नहीं
सर्वे/री-सर्वे नियमावली में संशोधन करे सरकार
भीलवाड़ा, 30 मार्च।
भीलवाड़ा विधायक अशोक कुमार कोठारी ने प्रदेश में भू-प्रबंधन विभाग द्वारा नवीन तकनीकी के आधार पर किए जा रहे सर्वेक्षण/पुनः सर्वेक्षण के लिए जारी दिशा-निर्देशों में आवश्यक संशोधन की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने राजस्थान सरकार के राजस्व मंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव , अध्यक्ष राजस्व मंडल तथा आयुक्त भू प्रबंध विभाग को पत्र प्रेषित कर किसानों के हित में नियमावली की समीक्षा कराने का आग्रह किया है।
विधायक कोठारी ने अपने पत्र में कहा कि भू-प्रबंधन विभाग द्वारा राजस्व रिकॉर्ड को अद्यतन करने के उद्देश्य से ‘‘राजस्थान सर्वेक्षण नियमावली भाग-2 (2019)’’ को 9 जुलाई 2021 को प्रकाशित किया गया था, ताकि विभागीय अधिकारी निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार कार्य कर सकें। उन्होंने बताया कि इस नियमावली के बिंदु संख्या 20(3) में आवंटित भूमि के संबंध में ऐसा प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार यदि जमाबंदी में दर्ज क्षेत्रफल और मौके पर उपलब्ध वास्तविक भूमि में अंतर पाया जाता है, तो वास्तविक कब्जे के अनुसार क्षेत्रफल दर्ज किए जाने के निर्देश है।
उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का व्यवहारिक प्रभाव यह हो रहा है कि यदि किसी किसान के नाम जमाबंदी में 10 बीघा भूमि दर्ज है, लेकिन मौके पर उसका कब्जा 8 बीघा पर पाया जाता है, तो शेष 2 बीघा भूमि सर्वे के दौरान कम दर्ज किए जाने की स्थिति बन रही है।
विधायक कोठारी ने कहा कि इस प्रकार की प्रक्रिया से किसानों के अधिकार प्रभावित होंगे और राजस्व न्यायालयों में अनावश्यक प्रकरणों की वृद्धि होंगी।
कोठारी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 136 तथा राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धाराएं 88 व 89 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी खातेदार का रकबा नवीन रिकॉर्ड में पूर्व दर्ज रकबे से कम हो जाता है, तो वह न्यायालय की शरण लेकर पुनः रकबा दर्ज कराने का दावा कर सकता है। ऐसे में यदि सर्वे के दौरान बड़े पैमाने पर खातेदारों के रकबे कम किए जाते रहे, तो प्रदेशभर में हजारों नए राजस्व प्रकरण खड़े होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को कम करने के प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे प्रावधानों के कारण नए मुकदमों की संख्या बढ़ सकती है, जो न तो किसानों के हित में है और न ही प्रशासनिक दृष्टि से उचित है।
विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि आवंटन के बाद किसान उतने ही रकबे पर कब्जा करता है, जितना संबंधित राजस्व कार्मिक अथवा पटवारी द्वारा उसे मौके पर दिया जाता है। यदि तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों की त्रुटि या लापरवाही के कारण किसान को कम भूमि पर कब्जा मिला है, तो उसका खामियाजा किसान क्यों भुगते। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव का कुल रकबा पूर्ववत सुरक्षित है और खातेदार का कब्जा कम पाया जाता है, तो कमी रकबे की पूर्ति उसी गांव में उपलब्ध राजकीय भूमि से की जानी चाहिए।
विधायक कोठारी ने राजस्व मंत्री से आग्रह किया कि राजस्थान सर्वेक्षण नियमावली भाग-2 (2019) के बिंदु संख्या 20 में वर्णित निर्देशों की पुनः समीक्षा कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि यदि किसी गांव का कुल रकबा साबिक जमाबंदी के अनुसार सुरक्षित है, तो किसी भी खातेदार का रकबा कम दर्ज न किया जाए। साथ ही, जहां मौके पर कब्जा कम हो, वहां कमी रकबे की पूर्ति उपलब्ध राजकीय भूमि से कर संबंधित खातेदार के नाम दर्ज करने के निर्देश जारी किए जाएं।
उन्होंने कहा कि ऐसा होने से प्रदेश के किसानों के साथ न्याय सुनिश्चित होगा और अनावश्यक राजस्व विवादों से भी बचा जा सकेगा।
