बिजौलिया। नगर में पत्रकार पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की ढिलाई पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। घटना के कई दिन बाद भी न तो सभी आरोपी गिरफ्तार हो पाए हैं और न ही लूटी गई संपत्ति बरामद की जा सकी है। खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे पीड़ित पत्रकार ने अब मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
नगर निवासी पत्रकार श्याम विजयवर्गीय ने ज्ञापन में बताया कि 1 अप्रैल 2026 की रात करीब 9:10 बजे उनके घर के बाहर कार में आए चार आरोपियों ने रास्ता रोककर उन पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान आरोपियों ने करीब 30 ग्राम सोने की चेन और 11 हजार रुपए नकद छीन लिए। इस संबंध में थाना बिजौलिया में मामला दर्ज कराया गया है।
पीड़ित का आरोप है कि घटना के 9 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने मामले में नामजद आरोपी लक्ष्मीनारायण उर्फ कालू (25) निवासी छोटा दरवाजा, बिजौलिया और हेमंत जांगिड़ (26) निवासी विवेकानंद नगर, कोटा को हिरासत में जरूर लिया, लेकिन नगरपालिका में संविदा पर कार्यरत योगेश अहीर सहित अन्य आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। इससे पीड़ित और उसका परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।
उन्होंने बताया कि 8 अप्रैल को भी रोडवेज बस स्टैंड पर आरोपियों ने लाल रंग की काले शीशों वाली कार में आकर उनकी रेकी की और जान से मारने की धमकी दी। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
विजयवर्गीय ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से न तो लूटी गई संपत्ति बरामद की गई और न ही उन्हें पीसी रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की गई, जिससे जांच की गंभीरता पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज, लाठी सहित अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद बिना नंबर की कार, सोने की चेन और नकदी की बरामदगी नहीं की गई है।
इसी बीच मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि नगरपालिका के नामजद संविदाकर्मी को बचाने के प्रयास में ठेकेदार के अधीन कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने बौखलाहट में आकर मनगढ़ंत तरीके से सुनियोजित रूप से सफेदपोशों की पनाह में उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है, ताकि पत्रकार पर दबाव बनाया जा सके।
पत्रकार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से करवाई जाए, संबंधित संविदाकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए, शेष आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए तथा उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
