यूनेस्को ने चलाया प्लास्टिक छोड़ो आंदोलन, प्रकृति से नाता जोड़ो:माली

BHILWARA
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भीलवाड़ा : राजकुमार गोयल
भीलवाड़ा 8 अगस्त। जिला यूनेस्को एसोसिएशन के तत्वाधान में व जवाहर फाउंडेशन तथा LNJ ग्रुप भीलवाड़ा के सहयोग से आज अगस्त क्रांति के अवसर पर शहर के नाड़ी मोहल्ला स्थित महावीर भवन में ध्यान योगी आगम ज्ञातl श्री विकसित मुनि महाराज व नवकार मंत्र आराधक गुरुदेव वीतराग मुनि महाराज के सानिध्य में प्लास्टिक छोड़ो अभियान की शुरुआत की गई।
कार्यक्रम संयोजक व स्टेट फेडरेशन ऑफ यूनेस्को एसोसिएशन इन राजस्थान के प्रदेश संयोजक गोपाल लाल माली ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहां की हम हर दिन अनजाने में ऐसे प्लास्टिक का उपयोग करते हैं जो सालों तक नष्ट नहीं होती और उसका खामियाजा हमारी धरती, जल और जीवन को भुगतना पड़ता है। माली ने नारा देते हुए कहा कि प्लास्टिक छोड़ो, प्रकृति से नाता जोड़ो उन्होंने यह भी कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक जैसे थेलिया, चम्मच, प्लेटस, स्ट्रा, कप आदि हमारे पर्यावरण के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं। अब समय है स्थाई विकल्प बनाने का जैसे झूट/ कपड़े के थैले, स्टील की बोतल, पत्तों या मिट्टी के बर्तन को पुनः हमारे जीवन में उपयोग में लानी होगी। एक छोटी आदत से बड़ा परिवर्तन शुरू हो सकता है। यही हमारा इस कार्यक्रम का उद्देश्य है इसलिए आप सभी से मैं आग्रह करता हूं कि आइये आज से ही कहें प्लास्टिक को ना प्रकृति को हां।
जिला यूनेस्को एसोसिएशन की प्रवक्ता मधु लोढ़ा ने बताया कि आज ही के दिन महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन चलाया था इसी तर्ज पर यूनेस्को द्वारा का प्लास्टिक छोड़ो आंदोलन लगातार चलाया जाएगा व शहर के अलग-अलग क्षेत्र में बड़े स्तर पर कपड़े के बैग वितरण किए जाएंगे। आज के शुभारंभ समारोह में जिला यूनेस्को एसोसिएशन के अध्यक्ष चेतन मानसिंहका, कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ललित अग्रवाल, सचिव जगदीशचंद्र मुंदडा, कोषाध्यक्ष विशाल विजयवर्गीय, संगठन सचिव कमलेश जाजू, दिनेश अरोड़ा,ओम उज्जवल, तोताराम माली, विजय कोठारी, रामचंद्र मूंदड़ा,श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के संरक्षक राम सिंह चौधरी, अध्यक्ष आनंद पीपाड़ा, मंत्री पारसमल कुकड़ा, कोषाध्यक्ष सुनील नागौरी, महिला संरक्षिका मंजू सिंघवी, महिला अध्यक्ष मधु लोढ़ा, मंत्री अर्पिता खमेसरा, सह मंत्री भूपेश सिंघवी व प्रदीप सिसोदिया, पिंटू बिलवाडिया, सुशीला बाई छाजेड़, प्रेम बाई खमेसरा, अजब्देवी लोढ़ा, नमिता डांगी, सुनीता बागचार
सहित सैकड़ो महिलाएं व पुरुष तथा यूनेस्को के सदस्य उपस्थित थे।