अवैध खनन पर कार्रवाई बनी दिखावा, कार्रवाई के बाद और तेज़ हुआ खनन — खनिज विभाग पर उठे सवाल

BHILWARA BIJOLIYA
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बिजौलिया। फतहनगर मार्ग पर बीते 2 जून को हुई खनिज विभाग की कार्रवाई महज औपचारिक बनकर रह गई है। जिस स्थान पर खुद विभाग ने अवैध खनन की पुष्टि कर एक भारी भरकम पोकलेन मशीन जब्त की थी और 4 लाख का जुर्माना लगाया था । वहां आज भी खुलेआम पत्थर निकाला जा रहा है। बीते डेढ़ माह में इस अवैध गतिविधि से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कार्रवाई के बाद भी खनन रोकने के लिए न तो उस स्थल की निगरानी की गई और न ही किसी स्थायी समाधान की पहल की गई। इससे स्थानीय लोगों में गहरा रोष है और विभाग की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।

2 जून को खनिज विभाग और राजस्व टीम ने मौके पर दबिश देकर खुदाई स्थल से 130 मीटर क्षेत्र में करीब 5 मीटर गहराई तक ताज़ा खुदाई के प्रमाण पाए थे। किसी भी प्रकार की वैध लीज या अनुमति दस्तावेज मौके पर प्रस्तुत नहीं किए गए थे। बावजूद इसके, न तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हुई और न ही अवैध खनन पर सख्ती हुई।

स्थानीय सूत्रों की मानें तो उसके बाद से वहां बड़े पैमाने पर खनन कार्य फिर शुरू हो गया, और अब तक हजारों टन पत्थर निकाला जा चुका है। अनुमान है कि इससे राजकोष को भारी राजस्व हानि हुई है।

लोगों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में खनिज विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है। जब एक बार खुद विभाग ने उस भूमि को अवैध खनन क्षेत्र घोषित कर मशीन जब्त की थी, तो फिर इतनी बड़ी ढील क्यों दी गई? क्या यह मिलीभगत का नतीजा है? ऐसे में सरकार की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि इस मामले में जांच कर अवैध खनन पर स्थायी रोक लगाई जाए।