माण्डलगढ़। पीरू मंसूरी
त्रिवेणी–जहाजपुर स्टेट हाइवे पर स्थित गोपालपुरा टोल प्लाजा पर फास्टैग से लाखों की अवैध ऑनलाइन वसूली का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भीलवाड़ा फोकस की खबर का तुरंत असर देखने को मिला। फोकस द्वारा किए गए खुलासे और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग में सामने आए तथ्यों के बाद टोल कंपनी और पुलिस हरकत में आई और जल्दबाजी में सिर्फ एक टोल कर्मी के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया। जबकि फर्जीवाड़े में पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है।

घटना के अनुसार 18 से 20 नवंबर के बीच टोल प्लाजा की बंद पड़ी केबिन संख्या 1 का सिस्टम चालू कर बिना वाहनों के गुजरे ही 535 भारी वाहनों के फास्टैग नंबरों से 580–580 रुपए के हिसाब से कुल 3,27,705 रुपए की ऑनलाइन वसूली की गई। भीलवाड़ा फोकस की पड़ताल में सामने आया कि 24 घंटे में इतने बड़े स्तर पर फास्टैग कटे, लेकिन टोल के सीसीटीवी कैमरों में एक भी वाहन टोल से गुजरता हुआ दिखाई नहीं दिया। इसी खुलासे के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ा।

फोकस की खबर सामने आने के बाद टोल प्लाज़ा संचालित करने वाली कंपनी के लेखाकार हनुमान गुर्जर ने माण्डलगढ़ थाने में टोलकर्मी खेमराज गुर्जर के खिलाफ रिपोर्ट दी कि उसने बंद केबिन को खोलकर फर्जी ऑनलाइन एंट्री कर लाखों रुपए का टैक्स वसूला। पुलिस ने लेखाकार की रिपोर्ट मिलते ही बिना किसी देरी के आरोपी खेमराज गुर्जर के खिलाफ धारा 318(4) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
हालांकि इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि टोल कंपनी के बैंक खाते में जमा हुई अवैध राशि के बावजूद रिपोर्ट सिर्फ एक टोलकर्मी पर क्यों दी गई? कंपनी, सुपरवाइजर, सिस्टम ऑपरेटर और मैनेजमेंट की भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई? रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कंपनी को फर्जीवाड़े की जानकारी 20 नवंबर को हो गई थी, लेकिन पुलिस में रिपोर्ट 23 नवंबर को ही दर्ज कराई गई, जिससे मामला दर्ज करने की जल्दबाजी और टोल कंपनी के बचाव के प्रयासों को लेकर संदेह और गहरे हो गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार फास्टैग कटने की प्रक्रिया अकेले किसी एक टोलकर्मी द्वारा संभव नहीं होती, क्योंकि इसके लिए सर्वर एक्सेस, बंद केबिन का सिस्टम एक्टिवेशन, कैमरा निगरानी और मैनेजमेंट की अनुमतियाँ जरूरी होती हैं। इसके बावजूद पुलिस द्वारा केवल एक कर्मी पर मामला दर्ज कर देना टोल प्रबंधन और पुलिस कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े करता है ?
इस संबंध में थानाधिकारी घनश्याम मीणा ने बताया कि मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन अभी कई महत्वपूर्ण पहलू बाकी हैं जिनकी वस्तुनिष्ठ जाँच के बाद ही पूरा सच सामने आएगा।
