शक्करगढ़ में प्रथम निर्वाण महोत्सव के अंतर्गत श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ, स्वामी जगदीश पुरी जी महाराज ने दिया दिव्य संदेश

BHILWARA
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शक्करगढ़। श्री संकट हरण हनुमत धाम एवं श्री संकटमोचन आदर्श गोशाला परिसर में आयोजित प्रथम निर्वाण महोत्सव के अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण के साथ हुआ। परमादर्श महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी जगदीश पुरी जी महाराज ने व्यासपीठ पर आरूढ़ होकर श्रद्धालुओं को भागवत महापुराण के दिव्य ज्ञान से अभिभूत किया।

कथा का शुभारंभ मंगलाचरण, गुरु वंदना एवं भागवत स्वरूप के पूजन के साथ हुआ। स्वामी जी महाराज ने भागवत के महात्म्य, उसके प्राकट्य की पावन कथा तथा मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात् स्वरूप है, जिसे केवल सुनना ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ हृदय में धारण करना आवश्यक है।



कथा श्रवण की विधि समझाते हुए स्वामी जी ने कहा कि भागवत श्रवण मन को निर्मल करने वाली अमृतधारा है, जिससे व्यक्ति के जीवन में स्वतः सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है। प्रथम दिवस पर उन्होंने व्यासजी के शोक, राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप, मृत्यु के सात दिन शेष रहने पर शुकदेव जी के आगमन और जीवन-मृत्यु के रहस्यों का सरल, प्रेरणादायी एवं हृदयस्पर्शी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन ईश्वर का दुर्लभ वरदान है, जिसे क्रोध, विवाद और नकारात्मकता में न गंवाकर प्रेम, सेवा, सत्संग और सदाचार से आभूषित करना ही सच्ची भागवत साधना है।




दिव्य संत समागम बना कथा का विशेष आकर्षण

कथा के दौरान हरिद्वार के निर्वाणपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानन्द भारती महाराज, स्वामी आनन्द चैतन्य सरस्वती एवं काशी के महामंडलेश्वर स्वामी प्रणव चैतन्यपुरी महाराज का पावन आगमन हुआ।
स्वामी विशोकानन्द भारती महाराज ने कहा कि श्रीमद् भागवत जीवन को सत्य, करुणा और भक्ति के मार्ग पर ले जाती है। स्वामी आनन्द चैतन्य सरस्वती ने सत्संग को मन की शुद्धि एवं जीवन की सरलता का मूल मंत्र बताया। वहीं स्वामी प्रणव चैतन्यपुरी महाराज ने कहा कि भागवत श्रवण से हृदय में प्रेम, शांति और अध्यात्म का प्रकाश प्रकट होता है।



हनुमत धाम में गूंज रहा है भागवत मूल पाठ

महोत्सव के दौरान वृंदावन के विद्वान पंडितों द्वारा मुकेश अवस्थी के निर्देशन में श्रीमद् भागवत का मूल पाठ परंपरागत विधि-विधान से किया जा रहा है। शुद्ध उच्चारण और मधुर स्वर में हो रहे इस दिव्य पाठ से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। श्रद्धालुओं का कहना है कि कथा स्थल पर व्याप्त शांति, भक्तिमय वातावरण और मूल पाठ की पवित्र ध्वनि से संपूर्ण परिसर अलौकिक अनुभूति से भर गया है।




आज होगी ‘श्रीबुद्धिप्रकाशम्’ की भव्य प्रस्तुति

महोत्सव के तहत गुरुवार को रात्रि 8 बजे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवि बुद्धिप्रकाश दाधीच की संगीत-काव्य प्रस्तुति ‘श्रीबुद्धिप्रकाशम्’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। आश्रम के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र जोशी ने बताया कि यह संध्या महोत्सव का प्रमुख आकर्षण होगी, जिसमें कवि अपनी आध्यात्मिक एवं भक्तिरस से परिपूर्ण रचनाओं से श्रद्धालुओं को भावविभोर करेंगे। आयोजन समिति द्वारा कार्यक्रम की विशेष तैयारियां की गई हैं।