बिजौलिया । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू एवं प्रस्तावित नए नियमों के विरोध में नगर निवासी रामप्रसाद विजयवर्गीय ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजते हुए उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी द्वारा लगातार किए जा रहे नीतिगत बदलावों से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने के बजाय विद्यार्थियों पर आर्थिक और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे मध्यमवर्गीय और साधारण परिवारों के छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि युवाओं को योग्य, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नीतियाँ इस मूल भावना से भटकती हुई प्रतीत होती हैं। बिना व्यापक जन-परामर्श के लिए गए ऐसे निर्णय न केवल विद्यार्थियों बल्कि उनके अभिभावकों के साथ भी अन्याय हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकता का इस प्रकार महँगा और जटिल होना देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।
विजयवर्गीय ने ज्ञापन में यह भी चिंता व्यक्त की है कि इन नियमों से स्वर्ण समाज, जो लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का कोर वोटर माना जाता रहा है, को सबसे अधिक नुकसान होने की संभावना है, जिससे समाज में असंतोष की स्थिति बन सकती है। ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है

कि यूजीसी द्वारा लागू या प्रस्तावित विवादास्पद नियमों पर तत्काल रोक लगाई जाए, शिक्षा नीतियों की पुनः समीक्षा कर उन्हें छात्र-हितैषी बनाया जाए तथा विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और समाज के प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए।














