शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
जैसलमेर के ऐतिहासिक मरू महोत्सव 2026 में इस बार शाहपुरा की पहचान एक बार फिर पूरे शान-ओ-शौकत के साथ गूंज उठी। शाहपुरा बियर्ड क्लब ने अपनी पारंपरिक दाढ़ी-मूंछ संस्कृति से ऐसा रंग जमाया कि पूरा मंच तालियों की गड़गड़ाहट से भर उठा। 30 जनवरी से 1 फरवरी तक चले इस राजस्थानी कला-संस्कृति के महाकुंभ में क्लब के चर्चित लोक कलाकार व कला-प्रेमी एडवोकेट दीपक पारीक ने मरूश्री व मूंछ प्रतियोगिता में भाग लेकर दर्शकों और निर्णायकों—दोनों को हैरान कर दिया।

दीपक पारीक की लंबी, घनी और सजी-संवरी दाढ़ी-मूंछ जैसे ही मंच पर आई, मानो परंपरा खुद चलकर सामने आ गई हो। उनकी शख्सियत, राजस्थानी ठाठ और आत्मविश्वास ने मंच पर ऐसा समा बांधा कि हर ओर “वाह-वाह” की गूंज सुनाई दी। निर्णायकों की नजरें थमी रहीं और दर्शकों की तालियां थमने का नाम नहीं ले रही थीं।
क्लब के संस्थापक और ‘मिस्टर बियर्ड मैन’ के नाम से मशहूर डॉ. इशाक खान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि “एडवोकेट दीपक पारीक ने शाहपुरा का परचम एक बार फिर मरूधरा की रेत पर लहराया है। मरू महोत्सव राजस्थान की आत्मा है, जहां मरूश्री और मिस मूमल जैसी प्रतियोगिताएं हमारी लोक परंपराओं को जीवंत रखती हैं। शाहपुरा बियर्ड क्लब इस धरोहर को संजोते हुए हर मंच पर अपनी पहचान बना रहा है।”
उन्होंने बताया कि इससे पहले भी शाहपुरा बियर्ड क्लब के कलाकार राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कमाल दिखा चुके हैं। स्वयं डॉ. इशाक खान तीन बार, जबकि धीरज पारीक और प्रवीण सुखवाल एक-एक बार अपनी प्रतिभा से शाहपुरा का नाम रोशन कर चुके हैं। इस कड़ी में अब एडवोकेट दीपक पारीक ने परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।

गौरतलब है कि शाहपुरा केवल ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि कलाओं की सशक्त पहचान भी है। दाढ़ी-मूंछ की परंपरा हो, रंगकर्म हो या साहित्य—हर क्षेत्र में शाहपुरा ने अपनी अलग छाप छोड़ी है। मरू महोत्सव 2026 में मिली यह कामयाबी इसी जीवंत सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है।
मरूधरा की रेत पर गूंजती तालियों के बीच शाहपुरा ने फिर साबित कर दिया—परंपरा जब जुनून बन जाए, तो पहचान खुद बन जाती है।













