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आचार्यश्री रामदयालजी ने राम से राष्ट्र तक का संकल्प दिलाया ;महाप्रभु रामचरण जी का 307वां प्राकट्य महोत्सव श्रद्धा से सम्पन्न ;रामनिवास धाम बना भक्ति और राष्ट्र चेतना का केंद्र, 398 भोग थाल संग निकली भव्य शोभायात्रा


शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक महाप्रभु स्वामी रामचरण जी महाराज का 307वां प्राकट्य महोत्सव रविवार को श्रद्धा, उत्साह व उल्लास के वातावरण में भव्य रूप से मनाया गया। रामनिवास धाम में रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगतगुरू आचार्यश्री स्वामी रामदयालजी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन का संयोजन अखिल भारतीय विजयवर्गीय मेवाड़ महासभा द्वारा किया गया।

इस मौके पर बारादरी में संत रामनारायण देवास, संत जगवल्लभराम महाराज, संत नवनिधराम महाराज सहित अन्य संत भी मौजूद रहे।
रामनिवास धाम में आज अलसुबह आरती-वंदना एवं समाधि पूजन के साथ कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद नया बाजार स्थित राममेडिया से 398 भोग थालों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई।

शोभायात्रा में विजयवर्गीय समाज के बंधु, महिलाएं तथा बड़ी संख्या में रामस्नेही अनुरागी शामिल हुए। महिला पुरूष नाचते गाते हुए चल रहे थे।


हाथी-घोड़े, बैंड-बाजे, छत्र-चंवर एवं शाही लवाजमे के साथ निकली शोभायात्रा नगर भ्रमण करती हुई रामनिवास धाम पहुंची। नाचते-गाते श्रद्धालुओं ने रामनिवास धाम में प्रवेश कर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। समापन अवसर पर रामनिवास धाम की बारादरी में विशाल धर्मसभा का आयोजन हुआ।

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बारादरी में हुई धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि “राम है तो राष्ट्र है और राष्ट्र है तो राम है, दोनों आत्मा और शरीर के समान हैं।” उन्होंने कहा कि भारत को हिन्दू राष्ट्र, धर्म राष्ट्र और संस्कृति राष्ट्र बनाने का संकल्प प्रत्येक नागरिक को लेना होगा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से गौरवपूर्वक कहने का आह्वान किया कि “हम हिन्दू हैं।”

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आचार्यश्री ने कहा कि जब धर्मध्वजा गगन में लहराती है, तब नगर, प्रदेश और राष्ट्र का निरंतर विकास होता है। संतों का आगमन किसी नगर को तीर्थ बना देता है। युवाओं को राष्ट्रप्रेम का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। गुरु पुष्प समान होते हैं और शिष्य को मधुमक्खी बनकर उस सुगंध को जीवन में आत्मसात करना चाहिए।


पीठाधीश्वर आचार्यश्री ने महाप्रभु स्वामी रामचरण जी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामस्नेही संप्रदाय का उद्देश्य केवल राम जप करना नहीं, बल्कि राष्ट्र का मंगल करना भी है। उन्होंने कहा “रा से राष्ट्र और म से मंगल होता है।”
शोभायात्रा का नगर में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। अखिल भारतीय विजयवर्गीय मेवाड़ महासभा के अध्यक्ष घनश्याम विजयवर्गीय, महामंत्री श्यामसुंदर विजयवर्गीय तथा जयंती संयोजक कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में आचार्यश्री का अभिनंदन किया गया। शोभायात्रा में लाए गए 398 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। पूरा शाहपुरा नगर रामनाम और राष्ट्रभावना से गूंज उठा।

KAPIL SHYAM VIJAY

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