भीलवाड़ा में गो-आधारित जैविक खेती का सात दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, 325 किसानों ने लिया संकल्प

BHILWARA
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भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सप्त दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सरोज देवी फाउंडेशन के संरक्षक त्रिलोकचंद छाबड़ा की पहल पर गोयल ग्रामीण विकास संस्थान ‘श्रीरामशान्ताय’ जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, जाखोड़ा (कैथून, कोटा), सरोज देवी फाउंडेशन, अपना संस्थान एवं एफ.ई.एस. (थ्म्ै) के संयुक्त तत्वावधान में 18 से 24 फरवरी 2026 तक किया गया। प्रशिक्षण प्रतिदिन प्रातः 10 से 11 बजे तक संचालित हुआ।


कार्यक्रम में श्रीरामशान्ताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के मुख्य वैज्ञानिक पवन टांक ने किसानों को गो आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक व व्यावहारिक जानकारी दी। सभी सत्रों में सरोज देवी फाउंडेशन के संरक्षक त्रिलोकचंद छाबड़ा का सतत मार्गदर्शन रहा।
समन्वयक महेशचंद्र नवहाल ने बताया कि प्रशिक्षण योजनाबद्ध विषय निर्धारण के साथ चरणबद्ध ढंग से कराया गया, जिससे किसानों को जैविक खेती की समग्र समझ विकसित हुई।



प्रमुख प्रशिक्षण विषय

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कृषि में तकनीकी जानकारी का महत्व, जैविक खेती हेतु खेत चयन, ताजा गोबर व गोमूत्र का उपयोग, बफर जोन व वृक्षारोपण, विविध वृक्ष प्रजातियों के लाभ व सावधानियां, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण, मिट्टी व पानी की प्रयोगशाला जांच, प्रारंभिक दस्तावेजीकरण (फार्म बुक), जैविक प्रमाणीकरण (च्ळै), अवशेष प्रबंधन व स्वच्छता, दीमक व सफेद मक्खी नियंत्रण, सरल खाद निर्माण, संजीवनी विधि से खेतों को पोषण, फसल अनुसार मात्रा निर्धारण, हरी खाद (ढैंचा) एवं गोमूत्र से हाई-पावर विधि जैसी तकनीकों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।

समापन सत्र के संदेश

समापन सत्र में कृषि विभाग, राजस्थान सरकार की प्रिंसिपल सेक्रेटरी (कृषि एवं उद्यानिकी) मंजू राजपाल ने राज्य सरकार की योजनाओं व सफल प्रयासों की जानकारी साझा करते हुए किसानों से जैविक एवं गो आधारित खेती अपनाने तथा अन्य किसानों को जोड़ने का आह्वान किया।
कृषि विभाग से डिप्टी डायरेक्टर राजेन्द्र सिंह मनोहर व अजय कुमार पचोरी ने भी मार्गदर्शन दिया।
श्रीरामशान्ताय केंद्र के संस्थापक ताराचंद गोयल ने जुड़े किसानों को “मास्टर ट्रेनर” बनकर प्रशिक्षण को गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि संस्थान का लक्ष्य गो आधारित जैविक खेती को वैज्ञानिक ढंग से स्थापित कर पहले ही वर्ष में रासायनिक खेती के बराबर उत्पादन प्राप्त करना है।


एफ.ई.एस. के स्टेट हेड एवं कोऑर्डिनेटर शांतनु राय सिन्हा ने विश्वास जताया कि यह अभियान हर ग्राम पंचायत तक पहुंचाया जाएगा।

सहभागिता और आगे की योजना

राज्य के लगभग 325 किसानों ने प्रशिक्षण में भाग लेकर अपने खेतों में जैविक खेती अपनाने का संकल्प दोहराया। एसडी फाउंडेशन से मनोज पालीवाल व भेरूलाल गुर्जर ने समन्वय किया। आयोजकों ने बताया कि यह प्रशिक्षण आगे भी निरंतर जारी रहेगा ताकि अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।