शाहपुरा- मूलचन्द पेसवानी
जयपुर में विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समाज के अधिकारी-कर्मचारियों का प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने अपने अधिकारों, आरक्षण तथा पुनर्वास से जुड़ी प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, मंत्रियों एवं विधायकों से मुलाकात कर मांग-पत्र सौंपा।
शाहपुरा क्षेत्र के डाबला चांदा निवासी तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनअधिकार समिति चित्तौड़ प्रांत के संयोजक कालूलाल बंजारा के नेतृत्व में प्रांत क्षेत्र से सैकड़ों लोगों ने सम्मेलन में भाग लेकर एकता और संगठन का परिचय दिया। कालूलाल बंजारा ने बताया कि यह प्रबुद्धजन महासम्मेलन आदर्श विद्या मंदिर स्कूल, अंबाबाड़ी, जयपुर में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित प्रदेश के कई मंत्री और समाज के पदाधिकारी शामिल हुए।


सम्मेलन में ओबीसी, एमबीसी एवं टीएसपी आरक्षण के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इसके बाद समाज के प्रतिनिधियों ने मंत्री ओटाराम देवासी से उनके जयपुर निवास पर लगभग तीन घंटे तक विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान मंत्री देवासी ने संबंधित सरकारी विभागों में यह विषय उठाने तथा शीघ्र मुख्यमंत्री से बैठक कर एमबीसी से जुड़े मसलों पर ठोस पहल का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने भी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मंत्रियों से चर्चा कर समाधान निकालने तथा पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह मामला अब सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है। महासम्मेलन में सहभागिता निभाने वाले सभी समाज बंधुओं का आभार व्यक्त किया गया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए कालूलाल बंजारा ने कहा कि प्रदेश में जहां-जहां घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जातियों के लोग वर्षों से निवास कर रहे हैं, वहां से उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई रोकी जाए और उन्हें वहीं पर पट्टे जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिनकी जड़ें इसी मिट्टी में हैं, उन्हें विस्थापित करना अन्याय होगा। इस मांग का समाजजनों ने जोरदार समर्थन किया।

इसके साथ ही सम्मेलन में टीएमसी में आरक्षण की मांग, घुमंतू जाति वर्ग में बागरिया व रैबारी समाज से जुड़ी मांगें, लबाना, रायका सहित अन्य जातियों को सूची में जोड़ने, समाज के कार्मिकों का रिकॉर्ड संधारित करने की व्यवस्था करने, जातीय सूचियों में मौजूद विसंगतियों को दूर करने, गुरु गोरखनाथ बोर्ड का गठन कर समाज के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने तथा जयपुर में शोध केंद्र स्थापित करने जैसी अनेक महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। महासम्मेलन के माध्यम से समाज ने स्पष्ट संदेश दिया कि अपने अधिकारों और सम्मानजनक जीवन के लिए अब संगठित होकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
