भक्ति में डूबा विजयपुरर] श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन उमड़ा जनसैलाब, कलश यात्रा ने बांधा समां

BHILWARA
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शाहपुरा, मूलचन्द पेसवानी
आज के भौतिकवादी दौर में जहां इंसान मोह-माया और सांसारिक सुखों में उलझकर अपने अनमोल जीवन को व्यर्थ गंवा रहा है, वहीं सच्चे मन से परमात्मा का स्मरण ही उसे वास्तविक आनंद की ओर ले जा सकता है। इसी भाव को जीवंत करते हुए विजयपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पहले दिन वातावरण पूरी तरह भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आया।



अरावली पर्वतमाला की सुरम्य वादियों के बीच नृसिंहद्वारा के समीप स्थित कृषि फार्म पर शुक्रवार से शुरू हुई इस सात दिवसीय कथा के प्रथम दिवस पर कथामर्मज्ञ संत दिग्विजय राम ने अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य सच्चे हृदय से परमपिता परमात्मा का नाम स्मरण करे, तो उसे अद्भुत परमानंद की प्राप्ति होती है। भागवत कथा को उन्होंने परमात्मा के मुखारविंद से निकला सर्वोत्तम ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसके श्रवण मात्र से प्राणी का कल्याण संभव है।

संत दिग्विजय राम ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा कि जिस भूमि पर भागवत कथा की ज्ञान गंगा बहती है, वहां स्वयं गंगा मैया प्रकट होकर जीवों का उद्धार करती हैं। उन्होंने जीवन को सफल बनाने के लिए भक्ति मार्ग अपनाने, मन और तन के भोगों से दूरी रखने तथा प्राणी मात्र के प्रति दया और सेवा भाव रखने का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने भागवत माहात्म्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कथा मनुष्य को जीवन जीने और मृत्यु को स्वीकार करने की सही दिशा सिखाती है।

कथा प्रारंभ से पहले विजयपुर में निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ नृसिंहद्वारा से शुरू हुई यह शोभायात्रा मुख्य मार्गों और बाजार से होते हुए कथा स्थल तक पहुंची। यात्रा में सजी-धजी ग्रामीण महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाते हुए चल रही थीं, वहीं बैंड-बाजों की मधुर धुनों ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। इस दौरान विभिन्न गांवों से आई प्रभात फेरियों का महासंगम भी देखने को मिला, जिसने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।

मूंदड़ा परिवार द्वारा आयोजित इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए पेयजल, सुरक्षा, आवास और विद्युत रोशनी के विशेष इंतजाम किए गए हैं। परिवार के मुखिया बंशी लाल मूंदड़ा और दामोदर मूंदड़ा ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4रू30 बजे तक आयोजित होगी और इसका समापन 7 मई को होगा।

कार्यक्रम में जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष राव नरेन्द्र सिंह विजयपुर, प्रशासक श्यामलाल शर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक और क्षेत्रभर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। पहले ही दिन उमड़ी आस्था की इस भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आज भी लोगों के दिलों में भक्ति की ज्योति प्रज्वलित है, बस उसे जागृत करने के लिए ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों की आवश्यकता है।