श्रावण में गूंजा हर-हर महादेव का घोष: मंगल कलश यात्रा से शिवमय हुआ शाहपुरा, शिवमहापुराण कथा के प्रथम दिवस शिवतत्त्व की दिव्य गंगा बही

BHILWARA
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शाहपुरा।  मूलचन्द पेसवानी                                                                                                                                                                                                                   श्रावण मास की पवित्र बेला, वातावरण में गूंजते “हर-हर महादेव” के जयघोष, श्रद्धा से सजे मंगल कलश और भक्ति की अविरल धारा… शनिवार को शाहपुरा नगर ऐसा शिवमय बना कि मानो स्वयं कैलाश की दिव्यता धरती पर उतर आई हो। श्रीनाथजी भक्त मंडल के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति के अनुपम संगम के साथ हुआ। नगर की सड़कों पर निकली भव्य मंगल कलश शोभायात्रा ने हर हृदय में शिवभक्ति का संचार कर दिया, जबकि कथा स्थल पर शिवमहापुराण के महात्म्य की अमृतवर्षा ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ निंबार्क तीर्थ से पधारे विद्वान वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के मध्य मंगल कलश पूजन एवं श्री शिवमहापुराण ग्रंथ के विधिवत पूजन से हुआ। वैदिक ऋचाओं की मधुर ध्वनि और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। इसके पश्चात नगर के प्राचीन श्री भाणा गणेशजी मंदिर से भव्य मंगल कलश शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ।


शोभायात्रा में पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजी-धजी सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर अनुशासित एवं भक्तिमय भाव से भाग लिया। भगवान भोलेनाथ के जयघोष, शिवभजनों और ढोल-नगाड़ों की मंगलमयी ध्वनि के बीच निकली शोभायात्रा त्रिमूर्ति चौराहा, मुख्य बाजार सहित विभिन्न मार्गों से होती हुई माहेश्वरी पंचायत भवन स्थित कथा स्थल पहुंची। यात्रा के दौरान पूरा नगर शिवभक्ति में डूबा नजर आया। श्रद्धालुओं के मुख से निरंतर गूंजते “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के उद्घोष ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।
मार्ग में त्रिमूर्ति चौराहे पर श्याम सेवा समिति, गणेश सेवा समिति, स्थानीय व्यापारियों एवं श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का आत्मीय स्वागत किया। वहीं मुख्य बाजार में भी विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और व्यापारिक संगठनों ने फूलों की वर्षा कर भगवान शिव की आराधना का अनूठा दृश्य प्रस्तुत किया। चारों ओर बिखरते पुष्प, शिवभक्ति में लीन श्रद्धालु और जयघोषों की गूंज ने नगर को शिवमय बना दिया।
कथा स्थल पर व्यासपीठ का विधिवत पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ श्री शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्रीश्रीजी महाराज के परम शिष्य गजेन्द्र गोपाल महाराज ने प्रथम दिवस कथा के दौरान श्री शिवमहापुराण के महात्म्य का अत्यंत भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शिवमहापुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का दिव्य प्रकाशपुंज है, जो मानव जीवन को धर्म, ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने बताया कि शिवमहापुराण का श्रवण मनुष्य के समस्त पापों का नाश कर उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है। भगवान शिव केवल देवों के देव महादेव ही नहीं, बल्कि करुणा, त्याग, समता और लोककल्याण के सर्वोच्च प्रतीक हैं। शिवमहापुराण में वर्णित प्रत्येक प्रसंग मानव जीवन को सत्य, संयम, सेवा और सदाचार की प्रेरणा देता है। महाराज ने कहा कि श्रावण मास में शिवमहापुराण कथा का श्रवण करना विशेष फलदायी माना गया है। इस पावन काल में भगवान शिव की आराधना और कथा श्रवण से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
प्रथम दिवस की कथा में उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति, शिवतत्त्व की महिमा तथा भगवान शिव की अनंत सत्ता का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि समस्त ब्रह्मांड का मूल तत्व शिव हैं। शिव ही सृष्टि के सृजन, पालन और संहार के परम आधार हैं। जब मनुष्य अहंकार, मोह और विकारों से ऊपर उठकर शिवतत्त्व को अपने जीवन में उतारता है, तभी उसके जीवन का वास्तविक कल्याण संभव होता है। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर शिवमहिमा का रसपान करते रहे और पूरा पांडाल “हर-हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
श्री श्रीनाथजी भक्त मंडल के प्रवक्ता अभिषेक सोनी ने बताया कि नौ दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा का आयोजन 9 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन अपराह्न 2 बजे माहेश्वरी पंचायत भवन में होगा। कथा के दौरान प्रतिदिन भगवान शिव के विभिन्न दिव्य चरित्रों, सनातन संस्कृति के आदर्शों तथा जीवनोपयोगी आध्यात्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।
उन्होंने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे सपरिवार कथा में उपस्थित होकर भगवान भोलेनाथ की अमृतमयी कथा का श्रवण करें और अपने जीवन को धर्म, भक्ति एवं संस्कारों से आलोकित बनाएं। श्रावण मास में आरंभ हुई यह शिवमहापुराण कथा न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि समाज में संस्कार, सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रेरणादायी महाअभियान भी बन गई है। नगरवासियों का उत्साह, श्रद्धा और सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि शाहपुरा की पावन धरा इन दिनों सचमुच शिवमय हो चुकी है।