भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
राष्ट्रसेवा और समाजसेवा को जीवन का ध्येय बनाकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता निरंतर मानवता की सेवा में जुटे हुए हैं। ये कार्यकर्ता सही मायने में ‘सिविल संन्यासी’ हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। यह विचार श्री रामस्नेही संप्रदाय के प्रधान पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज ने विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों के साथ हुई चर्चा के दौरान व्यक्त किए।
विश्व हिंदू परिषद राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री एवं सेवानिवृत्त इंजीनियर सुरेश उपाध्याय (जयपुर) चातुर्मास में साधनारत संतों के दर्शन के लिए भीलवाड़ा पहुंचे। उन्होंने श्री रामद्वारा में चातुर्मास कर रहे जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के ओमप्रकाश बुलिया, बद्रीलाल सोमानी, प्रांत सह मंत्री एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश किशन गुर्जर (अजमेर), प्रांत सह मंत्री युधिष्ठिर सिंह हाड़ा (कोटा), वनवासी कल्याण परिषद के प्रांत मंत्री रामप्रकाश अग्रवाल, शिक्षक संघ के जयकांत पत्रिया तथा सत्यनारायण जांगिड़ भी मौजूद रहे।
सभी पदाधिकारियों ने जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज से आशीर्वाद लिया। विश्व शांति कल्याण चातुर्मास आयोजन समिति, भीलवाड़ा की ओर से अशोक कुमार अजमेरा, मुरली ईनाणी एवं शिव गगरानी ने सभी अतिथियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
युवाओं को जगाने की जरूरत
जगतगुरु स्वामी रामदयालजी महाराज ने कहा कि श्री रामस्नेही संप्रदाय के संत और भक्त सदैव सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित रहे हैं और भविष्य में भी इसी भावना के साथ कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता युवाओं को जागृत और संस्कारित करने की है।
उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों से आह्वान किया कि युवाओं को राष्ट्र, समाज और संस्कृति से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जाएं। युवा शक्ति को सही दिशा मिलेगी तो समाज मजबूत होगा और इसी के माध्यम से विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।
सनातन और राष्ट्रसेवा पर मंथन
बैठक के दौरान सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, समाज संगठन, युवा जागरण और राष्ट्रसेवा सहित विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा हुई। संत और संगठन के पदाधिकारियों के बीच समाज में संस्कारों के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
स्वामी रामदयालजी महाराज ने कहा कि समाज की शक्ति उसके संस्कारों और संगठन में निहित है। ऐसे में संत समाज और सामाजिक संगठनों को मिलकर युवा पीढ़ी के भीतर राष्ट्रभक्ति, सेवा, संस्कार और संस्कृति के प्रति चेतना जगाने का कार्य करना चाहिए।
इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों ने भी सामाजिक एवं धार्मिक क्षेत्र में चल रहे सेवा कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं को लेकर अपने विचार रखे। संतों के सानिध्य में हुई इस चर्चा को समाज और संगठन के बीच समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
