’
मोहन मण्डेला की स्मृति में दिया जाने वाला राष्ट्रीय सम्मान 3-4 अक्टूबर को आयोजित 27वीं राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी में होगा प्रदान
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
साहित्य सृजन कला संगम के संस्थापक, राजस्थानी भाषा के स्थापित लोक कवि एवं बाल साहित्यकार स्वर्गीय मोहन मण्डेला की स्मृति में बाल साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित ‘बाल वाटिका सृजन सम्मान’ इस वर्ष महाजन-बीकानेर के वरिष्ठ राजस्थानी बाल साहित्यकार मदन गोपाल लढ़ा को प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मान 3 एवं 4 अक्टूबर को आयोजित होने वाली 27वीं राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।
राजस्थान साहित्य अकादमी एवं विनायक विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय साहित्यिक समारोह में देशभर से बाल साहित्यकार, साहित्यप्रेमी और रचनाकार जुटेंगे। समारोह के दौरान बाल साहित्य की वर्तमान स्थिति, उसकी दिशा, संभावनाओं और नई पीढ़ी तक साहित्य को पहुंचाने जैसे विषयों पर विभिन्न सत्रों में गहन विमर्श किया जाएगा।
बाल साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान
प्रति वर्ष ‘बाल वाटिका’ पत्रिका की ओर से आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय समारोह में विभिन्न साहित्यिक सत्रों के साथ प्रतिभाशाली साहित्यकारों का सम्मान भी किया जाता है। ‘बाल वाटिका सृजन सम्मान’ की शुरुआत बाल वाटिका के यशस्वी संपादक डॉ. भैरूंलाल गर्ग की प्रेरणा से की गई थी। यह सम्मान बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकार को प्रदान किया जाता है।
इस वर्ष सम्मान के लिए मदन गोपाल लढ़ा का चयन किया गया है। वे राजस्थानी बाल साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए बाल पाठकों के लिए साहित्य सृजन कर रहे हैं। सम्मान की घोषणा के साथ ही साहित्य जगत में इसे राजस्थानी बाल साहित्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
पहले भी देश के साहित्यकार हो चुके हैं सम्मानित
‘बाल वाटिका सृजन सम्मान’ पूर्व में भी देश के विभिन्न क्षेत्रों में बाल साहित्य के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले साहित्यकारों को प्रदान किया जा चुका है। पिछले वर्षों में ओडिशा के श्री विरंचीनारायण दास-कांताबाजी तथा नागौर के श्री पवन पहाड़िया को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है।
पुरस्कार के लिए साहित्यकार का चयन बाल वाटिका समिति द्वारा अपने स्तर पर किया जाता है। समिति साहित्यकार के बाल साहित्य में योगदान और रचनात्मक अवदान को ध्यान में रखते हुए सम्मान का निर्णय करती है।
मोहन मण्डेला की साहित्यिक विरासत को सम्मान
लोक कवि मोहन मण्डेला का राजस्थानी भाषा और बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है। उनके साहित्यिक अवदान को देखते हुए राजस्थान सरकार द्वारा स्थापित श्री जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी, जयपुर की ओर से भी उनके नाम पर नियमित पुरस्कार की घोषणा की गई थी।
उनकी स्मृति में प्रदान किया जाने वाला ‘बाल वाटिका सृजन सम्मान’ राजस्थानी बाल साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ ही नई पीढ़ी के लिए साहित्य सृजन करने वाले रचनाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
बाल साहित्य की दशा और दिशा पर होगा मंथन
दो दिवसीय राष्ट्रीय बाल साहित्य समारोह में बाल साहित्य की दशा और दिशा पर केंद्रित कई सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें बाल साहित्य की वर्तमान चुनौतियों, बदलते समय में बच्चों की बदलती रुचियों, बाल साहित्य की भाषा-शैली तथा बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने जैसे विषयों पर साहित्यकार विचार-विमर्श करेंगे।
नवंबर में होगी साहित्यिक आयोजन की घोषणा
साहित्य सृजन कला संगम की ओर से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की घोषणा नवंबर में की जाएगी। इस अवसर पर मायड़ भाषा के किसी प्रतिष्ठित जनकवि को सम्मानित किया जाएगा। संस्था की ओर से राजस्थानी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकारों को निरंतर सम्मानित करने की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।
साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने मदन गोपाल लढ़ा को ‘बाल वाटिका सृजन सम्मान’ के लिए चयनित किए जाने पर शुभकामनाएं दी हैं और इसे राजस्थानी बाल साहित्य के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया है।
