भीलवाड़ा-मूलचन्द पेसवानी
सरकारी तंत्र और अधिकारियों की निष्क्रियता के बीच समाज के लोगों ने यह दिखा दिया कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। बरूंदनी-बड़लियास मार्ग पर बहने वाली बेड़च नदी पर बने पुराने पुल की हालत जर्जर हो चुकी थी। आए दिन इस पुल पर वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएँ सामने आ रही थीं। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन को पुल की मरम्मत के लिए अवगत करवाया, यहाँ तक कि समाचार पत्रों में भी पुल की दुर्दशा के समाचार प्रकाशित हुए, लेकिन सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।

ऐसे में सिंगोली बरून्दनी क्षेत्र के समाजसेवी और भामाशाह घनश्याम राठी आगे आए और उन्होंने इस समस्या को खुद सुलझाने की ठानी। राठी ने अपने खर्चे से पुल पर बने खड्डों की मरम्मत करवाने का निर्णय लिया। मंगलवार की सुबह वे स्वयं मजदूरों और राजमिस्त्री के साथ मौके पर पहुँचे और मरम्मत कार्य की शुरुआत की। सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चले इस अभियान में पुल पर बने गहरे खड्डों को सीमेंट-कंक्रीट से भरा गया। राठी खुद मरम्मत कार्य की निगरानी करते रहे और मजदूरों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे।
मरम्मत कार्य को देखकर आसपास के ग्रामीण भी प्रेरित हुए और कई लोगों ने श्रमदान में भाग लिया। इस अवसर पर कोटड़ी के पूर्व प्रधान विजयसिंह के मार्गदर्शन में बड़लियास के पूर्व सरपंच सत्यनारायण काबरा, मयूर मिस्त्री, कालू लाल जायसवाल भी मौके पर पहुंचे और श्रमदान किया। इन्हें देखकर नानूराम गंवारिया, कालू लाल पालीवाल, ओमप्रकाश शर्मा, राजेश जायसवाल, और शंकर खटीक भी आए और पुल की मरम्मत में हाथ बँटाया। तीन घंटे की मेहनत में पुल के सभी प्रमुख खड्डे भर दिए गए और पुल फिर से वाहनों की आवाजाही के लिए सुरक्षित बन गया।
गौरतलब है कि यह बेड़च नदी का पुल 54 वर्ष पूर्व निर्मित हुआ था। इसका शिलान्यास राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं कर्नाटक के राज्यपाल रहे मोहनलाल सुखाड़िया ने किया था, जबकि इसका लोकार्पण तत्कालीन विधायक और मंत्री शिवचरण माथुर ने किया था। यह पुल भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जो वर्षों से रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो चुका था।

घनश्याम राठी माहेश्वरी धर्मशाला समिति सिंगोली चारभुजा एवं चारभुजा नाथ गो सेवा संस्थान सिंगोली के अध्यक्ष हैं और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “अगर हम हर छोटी-बड़ी समस्या को सरकार के भरोसे छोड़ देंगे, तो सुधार में वर्षों लग जाएंगे। समाज के लोगों को आगे आना चाहिए और छोटी-छोटी पहलों से परिवर्तन की शुरुआत करनी चाहिए।”
राठी की इस पहल से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने कहा कि राठी ने न केवल पुल की मरम्मत करवाई बल्कि पूरे समाज को एकजुट होकर काम करने का संदेश भी दिया। राहगीरों ने भी पुल की मरम्मत देखकर संतोष जताया और कहा कि इससे अब दुर्घटनाओं में कमी आएगी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कार्य सरकारी विभागों की आँखें खोलने वाला है। जब एक व्यक्ति अपने खर्चे और श्रमदान से इतना बड़ा कार्य कर सकता है, तो विभागों को भी सक्रियता दिखानी चाहिए। राठी और उनके सहयोगियों द्वारा किया गया यह कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। यह पहल यह संदेश देती है कि “समाज यदि ठान ले, तो परिवर्तन निश्चित है।”
