बारूद बने बाजार, एक चिंगारी से मची तबाही,लापरवाही ने दी हादसे को दावत

BHILWARA
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फतेहपुर।
दीपावली की तैयारियों के बीच खुशियों का बाजार रविवार दोपहर चीख-पुकार में बदल गया, जब उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जिले के लोधीगंज हाईवे किनारे स्थित पटाखा मंडी में भीषण आग लग गई। कुछ ही मिनटों में उठी लपटों ने दर्जनों दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते 70 से अधिक दुकानें राख में बदल गईं।
चश्मदीदों के अनुसार, पहले एक दुकान से धुआं उठता दिखाई दिया, और कुछ ही क्षणों में तेज धमाकों के साथ पूरा क्षेत्र दहल उठा। आग इतनी तेज थी कि धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई देने लगा।


घंटों बाद काबू पाया जा सका, दर्जनों लाख का नुकसान

आग लगते ही पूरे क्षेत्र में भगदड़ मच गई। सूचना पर फतेहपुर फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया। लेकिन तब तक अधिकांश दुकानें जल चुकी थीं। प्रशासन ने एहतियातन आस-पास के इलाकों की बिजली सप्लाई बंद कर दी। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों की निगरानी की। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या लापरवाही को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। फिलहाल नुकसान करोड़ों में आंका जा रहा है।

बिजोलिया में भी मंडरा रहा है फतेहपुर जैसा खतरा

फतेहपुर की इस दर्दनाक घटना ने भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया को भी चेतावनी दे दी है जहां पिछले कई दिनों से मुख्य बाजार में अवैध पटाखा दुकानों का जमावड़ा प्रशासन की आंखों के सामने बढ़ता जा रहा है। यहां प्रशासन आंख मूँदकर बाजार में लगी दुकानों को अनदेखा कर निकल रही है ।
जैसा कि पहले भी बताया गया था, बिजोलिया के तेजाजी चौक से पंचायत चौक तक करीब 50 टन से अधिक बारूद भीड़भाड़ वाले इलाके में खुलेआम रखा गया है। नगर पालिका और प्रशासन की अनुमति केवल 18 दुकानों के लिए थी, लेकिन अब 40 से अधिक दुकानें बिना स्वीकृति के मुख्य बाजार में पटाखे बेच रही हैं।


यही नहीं, फल-सब्जी और कपड़े की दुकानों से भी पटाखों की बिक्री खुलेआम की जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक हस्तक्षेप और दबाव के चलते प्रशासन मौन है, जिससे फतेहपुर जैसी दुर्घटना कभी भी दोहराई जा सकती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: “भीड़भाड़ में बारूद, हादसे को न्योता”

अग्निशमन विशेषज्ञों का कहना है कि संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले बाजारों में पटाखों का भंडारण और बिक्री आग से खेलने जैसा है।
यदि बिजोलिया जैसे बाजार में आग लगती है तो लोगों के लिए भागने तक की जगह नहीं बचेगी, और नुकसान फतेहपुर से कहीं अधिक भयावह हो सकता है।

प्रशासन के लिए सबक या इंतजार किसी त्रासदी का?

जैसलमेर, और अब फतेहपुर की घटनाएं साफ संकेत दे रही हैं कि पटाखा व्यापार में लापरवाही और दबाव राजनीति किसी भी शहर को मिनटों में खाक के ढेर में बदल सकती है।

बिजोलिया जैसे नगरों में अब प्रशासन के पास दो ही विकल्प हैं –
या तो समय रहते कार्रवाई कर सुरक्षा सुनिश्चित करे,
या फिर फतेहपुर जैसी किसी भीषण त्रासदी के बाद अफसोस जताने के लिए तैयार रहे।