बिजौलिया।
किसान आंदोलन के अग्रदूत साधु सीताराम दास बैरागी की प्रतिमा को उड़ाने का प्रयास कर असामाजिक तत्वों ने न सिर्फ कानून को चुनौती दी, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान पर भी वार किया है। घटना गुरुवार देर रात की बताई जा रही है, जब अज्ञात लोगों ने विजय सागर तालाब किनारे स्थित स्मारक परिसर में सुतली बम रखकर विस्फोट करने की कोशिश की।
स्मारक समिति के अध्यक्ष उमा शंकर वैष्णव ने बताया कि विस्फोट से मूर्ति की सुरक्षा के लिए लगी फाइबर शीट फट गई और आसपास के हिस्से में बम के अवशेष है। घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
तालाब में नाव चला रहा एक युवक चश्मदीद गवाह बना, उसने दो संदिग्ध युवकों को मूर्ति के पास विस्फोटक रखते हुए देखा था। जब उसने आवाज लगाई तो दोनों युवक अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले।
घटना की जानकारी मिलते ही सुबह पंचायत समिति सदस्य हितेन्द्र सिंह राजौरा, कांस्टेबल सुरेश मीणा और विजय सिंह मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने उमा शंकर वैष्णव की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व भी अज्ञात लोगों ने इसी मूर्ति को क्षतिग्रस्त करते हुए उसकी नाक तोड़ दी थी। लगातार दूसरी वारदात से क्षेत्रवासियों में आक्रोश व्याप्त है।
कौन थे साधु सीताराम दास बैरागी?
साधु सीताराम दास बैरागी न सिर्फ एक संत और समाज सुधारक थे, बल्कि किसान चेतना के प्रतीक भी थे।
उन्होंने अपने जीवन में शोषण और अन्याय के खिलाफ किसानों की आवाज को बुलंद किया, और भीलवाड़ा सहित राजस्थान के कई इलाकों में आंदोलन खड़ा किया।
उनकी वाणी ने हजारों किसानों में जागृति की लौ जलाई “किसान उठेगा तो भारत बचेगा” का उनका संदेश आज भी गूंजता है।
साधु बैरागी का जीवन सरल था, पर उनके विचार प्रचंड थे। वे गांव-गांव घूमकर किसानों को संगठित करते, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश देते थे। आज उनका स्मारक केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतीक है जिसने भारत की आज़ादी और किसान स्वाभिमान की लड़ाई में नई दिशा दी














