बिजौलिया उपखण्ड के संभावित विलोपन पर आक्रोश; पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय ने आंदोलन को दिया समर्थन , बोले जनता के साथ ग़लत नहीं होने देंगे

BHILWARA
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बिजौलिया। राज्य सरकार की पुनर्गठन सलाहकार समिति द्वारा जारी पत्र के बाद बिजौलिया उपखण्ड को मांडलगढ़ में विलय किए जाने की आशंका गहराती जा रही है। इसी को लेकर सोमवार को क्षेत्रवासियों ने उपखण्ड कार्यालय पहुंचकर उपखण्ड अधिकारी अजीत सिंह राठौड़ को ज्ञापन सौंपा और जनता की गहरी चिंता से अवगत कराया।

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गौरतलब है कि समिति द्वारा बीती 8 अगस्त को जारी पत्र में प्रदेश की सभी उपखण्ड एवं तहसील के पून: निर्धारण एवं मानको पर खरी नहीं उतर रहे राजस्व विभागो के विलय करने से अवगत कराया है । क्षेत्रवासियों को आशंका है कि बिजोलिया उपखण्ड को भी निर्धारित मानकों पर कमतर बताया गया है, जिसके बाद इसके विलोपन की संभावना ने ग्रामीणों में गुस्सा और बेचैनी बढ़ा दी है।

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ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि यदि उपखण्ड कार्यालय को माण्डलगढ़ में समाहित किया गया तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी लंबा सफर तय करना पड़ेगा, जिससे समय, धन और श्रम का भारी नुकसान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि उपखण्ड हटने से राजस्व कार्यों में देरी, कानून-व्यवस्था पर प्रभाव और योजनाओं के लाभ से वंचित होने की स्थितियाँ पैदा होंगी।



इस दौरान पूर्व प्रधान गोपाल मालवीय भी प्रतिनिधिमंडल के साथ रहे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। मालवीय ने कहा कि बिजौलिया उपखण्ड वर्षों से क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकता रहा है और इसका विलोपन जनता के लिए बड़ी परेशानी बनेगा। उन्होंने उपखण्ड अधिकारी राठौड़ को बताया कि उपखण्ड हटने से न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में गंभीर बाधाएँ आएंगी।

उपखण्ड अधिकारी अजीत सिंह राठौड़ ने ज्ञापन प्राप्त कर ग्रामीणों की चिंता को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि उपखण्ड में किसी भी तरह का बदलाव हुआ तो क्षेत्र में बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा।