*भीलवाड़ा-मूलचन्द पेसवानी
भीलवाड़ा जिले के आसींद कस्बे में राष्ट्रीय राजमार्ग 158 (छभ्-158) का मात्र सात सौ मीटर लंबा हिस्सा पिछले चार वर्षों से अधूरा पड़ा है। यह छोटा सा टुकड़ा अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। हरिजन बस्ती से माधव रिसॉर्ट तक के इस मार्ग का निर्माण नहीं होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है,

वहीं सड़क की जद में आने वाले मकानों को हटाए जाने के बाद प्रभावित परिवारों की परेशानियां और भी बढ़ गई हैं। प्रशासनिक अनदेखी और लगातार टलते आश्वासनों से नाराज लोगों ने सोमवार को अनोखे और तीखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया।
यूथ कांग्रेस आसींद विधानसभा अध्यक्ष दिनेश गुर्जर के नेतृत्व में पीड़ित परिवारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने खून से तीन सूत्रीय मांगों का ज्ञापन लिखकर आसींद उपखंड कार्यालय में सौंपा। यह विरोध न केवल प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए था, बल्कि वर्षों से लंबित सड़क निर्माण को लेकर जनता के सब्र के टूटने का भी संकेत था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब चार माह पूर्व स्थानीय प्रशासन के सहयोग से छभ्-158 के अधिकारियों ने सड़क निर्माण का हवाला देते हुए सड़क की जद में आने वाले कई मकानों को हटा दिया। लोगों ने यह सोचकर अपने आशियाने टूटने दिए कि जल्द ही सड़क बनेगी और क्षेत्र का विकास होगा। लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद न तो सड़क निर्माण शुरू हुआ और न ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की गई। मकान टूटने के बाद कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों या रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं।

बरसात के दिनों में कीचड़ और सर्दियों में धूल के कारण इस अधूरे मार्ग से गुजरना मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को रोजाना जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क खराब होने से ग्राहक कम हो गए हैं और व्यापार पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
इसी आक्रोश के चलते यूथ कांग्रेस और पीड़ित परिवारों ने खून से ज्ञापन लिखकर प्रशासन को चेतावनी दी। ज्ञापन में मांग की गई कि सात सौ मीटर सड़क का निर्माण तत्काल शुरू किया जाए, प्रभावित परिवारों को राहत व मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में इस तरह की लापरवाही न बरती जाए।
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुर्जर ने उपखंड कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि 4 जनवरी तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तो 5 जनवरी को समस्त वार्डवासियों के साथ लोटन यात्रा निकाली जाएगी। यह लोटन यात्रा उसी स्थान से शुरू होगी, जहां सड़क निर्माण वर्षों से बंद पड़ा है, और उपखंड कार्यालय तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यह शांतिपूर्ण लेकिन प्रतीकात्मक विरोध होगा, ताकि प्रशासन को जनता की पीड़ा का अहसास कराया जा सके।

दिनेश गुर्जर ने आगे चेतावनी दी कि यदि लोटन यात्रा के बाद भी प्रशासन नहीं जागा तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। इसके तहत उपखंड कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन अनशन, धरना और प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इसके बाद भी सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे देह त्याग जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।
वहीं पीड़ित परिवारों की ओर से बोलते हुए सुशीला माली ने कहा कि सड़क के नाम पर उनके मकान तोड़ दिए गए, लेकिन न सड़क बनी और न ही रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को भारी मानसिक और आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम से आसींद कस्बे में तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय लोग भी इस आंदोलन के समर्थन में आगे आने लगे हैं। उनका कहना है कि सात सौ मीटर की सड़क अगर चार साल में नहीं बन सकती, तो यह प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़ा सवाल है।
अब सबकी निगाहें प्रशासन और एनएच-158 के अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर चेतावनी और जनआक्रोश को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि समय रहते सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो आसींद में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी गूंज जिले से लेकर राज्य स्तर तक सुनाई दे सकती है।
