विधानसभा के शून्यकाल में गूंजा बजरी मुद्दा विधायक अशोक कोठारी ने सस्ती व सुलभ बजरी उपलब्ध कराने की उठाई मांग

BHILWARA
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भीलवाड़ा 3 फरवरी। राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने प्रदेश में बजरी की बढ़ती कीमतों, अवैध खनन और उससे बिगड़ती कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में निर्माण कार्यों की निरंतरता आवश्यक है, लेकिन बजरी की कमी और महंगाई के कारण आमजन, निर्माणकर्ता और छोटे ठेकेदार अत्यधिक प्रभावित हो रहे हैं।


विधायक कोठारी ने कहा कि एम-सैंड पॉलिसी अच्छी होने के बावजूद सभी निर्माण कार्यों में इसका उपयोग संभव नहीं है। मांग अधिक और आपूर्ति कम होने के कारण बजरी की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे कालाबाजारी और अवैध खनन को बढ़ावा मिल रहा है। इससे अपराध बढ़ रहे हैं और कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।


उन्होंने बताया कि जनहित में सरकार द्वारा लाई गई बजरी नीति-2024 के अंतर्गत 50 से 100 हेक्टेयर के छोटे क्षेत्रों में 255 बजरी लीज की पारदर्शी नीलामी की गई थी। डीएसआर रिपोर्ट के आधार पर भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर और अजमेर जिलों में वर्ष 2024 में 93 बजरी लीज का ऑक्शन हुआ, जिनमें अकेले भीलवाड़ा की 49 लीज शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य था कि आमजन को 250 से 300 रुपये प्रति टन की दर से बजरी उपलब्ध हो, लेकिन वर्तमान में वही बजरी 1000 से 1500 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है।


कोठारी ने सुप्रीम कोर्ट के सिविल रिट याचिका 3661/2020 (पवन कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार) के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन जरूरी है, लेकिन कानूनी खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से अवैध खनन और रेत माफियाओं को बढ़ावा मिलता है, जिससे अपराध और जानमाल का खतरा बढ़ता है तथा सरकारी राजस्व को भी नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में उच्च न्यायालय द्वारा सीएसी रिपोर्ट की एक शर्त के आधार पर इन लीजों को निरस्त कर दिया गया, जबकि वह शर्त खनन संचालन से संबंधित है। इसके चलते अवैध बजरी पर रोक लगाने के लिए माइनिंग इंजीनियरों और पुलिस बल को अन्य कार्य छोड़कर लगाना पड़ रहा है। साथ ही बेरोजगार युवा अवैध बजरी के कार्य से जुड़कर अपना भविष्य खराब कर रहे हैं।
विधायक कोठारी ने सरकार से मांग की है कि बजरी को पूर्णतया निःशुल्क कर इसका अधिकार ग्राम पंचायतों को सौंपा जाए ताकि तय मापदंडों के अनुसार खनन हो और अवैध खनन पर रोक लगे।
साथ ही पूर्व व्यवस्था के अनुसार ‘कांटों’ से आमजन को बजरी उपलब्ध करवाई जाए।
निरस्त की गई सभी बजरी लीजों को पुनः सरकार की नीति के अनुसार चालू किया जाए।


उन्होंने बताया कि निरस्त लीजों से सरकार को 117 करोड़ रु का प्रीमियम प्राप्त हुआ था और सरकार की बनाई नीति जनहितैषी है, इसलिए इसे उच्च स्तर पर पुनः बहाल कर शीघ्र कार्यवाही की जाए।
साथ ही उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि चंबल डेम से गाद निकालने के लिए अधिकृत कंपनी अपने निर्धारित कैचमेंट एरिया से बाहर कार्य कर रही है। इस पर रोक लगाते हुए कंपनी का कार्यक्षेत्र निर्धारित करने और उसके कार्यों की जांच कराने की मांग भी की।
विधायक कोठारी ने कहा कि यदि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो अवैध खनन, अपराध और महंगाई की समस्या और गंभीर हो जाएगी। उन्होंने सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप कर आमजन को राहत देने की अपील की।