खस्ताहाल सड़क बनी ‘मौत का हाईवे’, हादसे के बाद भी सिस्टम बेखबर
मासूम की मौत से मचा हड़कंप, फिर भी नहीं जागे जिम्मेदार
टूटी सड़क, चालू टोलकृजनता बोलीः अब नहीं सहेंगे ये खेल
शाहपुरा, मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा-सांगानेर मॉडल स्टेट हाईवे इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की आंखों से नींद अभी तक नहीं टूटी है। मंगलवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने एक बार फिर इस जर्जर सड़क की हकीकत को बेनकाब कर दिया। हादसे में एक मासूम बालिका की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। सवाल यही उठ रहा है कि आखिर कब तक यह सड़क यूं ही लोगों की जान लेती रहेगी?

स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि सड़क की हालत ठीक होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था। यह कोई पहला हादसा नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बार यहां दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी जिम्मेदार विभाग की सुस्ती ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है।
शाहपुरा शहर से बाहर निकलते ही सड़क की असलियत सामने आ जाती है। जगह-जगह उखड़ी हुई सड़क, बड़े-बड़े गड्ढे और धंसे हुए हिस्से हर पल दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति शाहपुरा बाईपास टोल प्लाजा के सामने सूरज सिंह जी का खेड़ा और तसवारिया क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जहां रिटेनिंग की समस्या के कारण सड़क कई जगह से धंस चुकी है। यहां से गुजरना मानो मौत को दावत देने जैसा हो गया है।
डूगरी चौराहे से लेकर सूरज सिंह जी का खेड़ा तक मुख्य मार्ग पर दो से तीन फीट गहरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी बने हुए हैं। तसवारिया क्षेत्र में तो सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। दिन हो या रात, हर वक्त वाहन चालकों को अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करना पड़ रहा है।
इसी बीच स्थानीय लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। उनका आरोप है कि टोल प्लाजा कंपनी लगातार टोल वसूली कर रही है, लेकिन सड़क की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। लोगों ने ‘सड़क नहीं तो टोल नहीं’ का नारा बुलंद करते हुए साफ चेतावनी दी है कि जब तक सड़क दुरुस्त नहीं होती, तब तक टोल वसूली बंद की जानी चाहिए।
जीव दया सेवा समिति शाहपुरा के संयोजक अतू खा कायमखानी ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए कहा कि शाहपुरा से बनेड़ा तक की पूरी सड़क का तत्काल निरीक्षण कर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल रही है, जिससे आमजन में भारी आक्रोश व्याप्त है।
समिति ने आरएसआरडीसी और प्रशासन के आला अधिकारियों से मांग की है कि वे खुद मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक स्थिति का जायजा लें और जल्द से जल्द मरम्मत के निर्देश जारी करें। उनका कहना है कि यह मार्ग जिला मुख्यालय तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है, इसलिए इसकी अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। अब पूरे क्षेत्र की नजर आरएसआरडीसी की कार्रवाई पर टिकी हुई है। सवाल यही है क्या एक और हादसे का इंतजार किया जाएगा, या फिर इस बार जिम्मेदार समय रहते जागेंगे?
