*नवगठित नगर पालिका बनेड़ा: एक साल बाद भी मूलभूत सुविधाएं अधूरी, जनता बोली—अब जिम्मेदारी तय हो*

BHILWARA
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*फोकस भीलवाड़ा न्यूज़ बनेड़ा -परमेश्वर दमामी*

नगर पालिका बनेड़ा के गठन को एक वर्ष पूर्ण होने के बावजूद कस्बे में अपेक्षित सुधार धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। जिस बदलाव से नागरिकों ने स्वच्छता, बेहतर पेयजल, सुचारु रोशनी और व्यवस्थित शहर की उम्मीद की थी, वह अब तक अधूरी दिखाई दे रही है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते एक वर्ष में कई बार ज्ञापन देकर प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन हालात में ठोस सुधार नहीं हुआ। कस्बे के कई वार्ड आज भी अनियमित सफाई व्यवस्था, कचरे के ढेर, जाम नालियों, बंद पड़ी रोड लाइटों और पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। वहीं, अतिक्रमण की बढ़ती समस्या ने आमजन के आवागमन को भी प्रभावित किया है।
नागरिकों में सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनकी समस्याओं की सुनवाई के लिए कोई स्पष्ट और प्रभावी मंच नजर नहीं आता। चेयरमैन पद रिक्त होने और प्रशासनिक ढांचे की धीमी सक्रियता के कारण निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। परिणामस्वरूप, जनता में यह भावना पनप रही है कि आखिर उनकी आवाज़ सुनेगा कौन।
हालांकि, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा प्रयास किए जाने की बात भी सामने आई है, लेकिन इन प्रयासों का असर जमीनी स्तर पर पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में अब जरूरत है कि प्रयासों को परिणाम में बदला जाए और जवाबदेही स्पष्ट की जाए।
जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर पालिका में जनसुनवाई की नियमित और पारदर्शी व्यवस्था शुरू की जाए, वार्ड स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति हो, और सफाई, पेयजल व रोशनी जैसी मूलभूत सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुधार किया जाए। साथ ही अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा भी जताई गई है।
जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा की जा रही है कि वे केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर सक्रिय भूमिका निभाएं और जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।
कस्बे के नागरिकों का कहना है कि वे विरोध नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं। यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर गंभीरता से कार्य करें, तो बनेड़ा को एक स्वच्छ, सुव्यवस्थित और आदर्श नगर पालिका बनाया जा सकता है।
अब समय आ गया है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी जिम्मेदारी को समझें और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरें—क्योंकि विकास केवल घोषणा से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले बदलाव से तय होता है।