पुरुषोत्तम माह महोत्सव में रामकथा का चौथा दिन बना भक्तिमय

BHILWARA
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विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक और हरिनाम संकीर्तन से गूंज रहा आश्रम परिसर
भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर परिसर में चल रहे पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चैथे दिन पूरा वातावरण राममय हो उठा। हरिद्वार स्थित महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने व्यासपीठ से भगवान श्रीराम जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कथा के दौरान स्वामी जगदीश दास उदासीन ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान विभिन्न अवतारों के माध्यम से धर्म की स्थापना करते हैं। त्रेता युग में रावण के अत्याचारों से पृथ्वी व्याकुल हो उठी थी, तब देवताओं और ऋषि-मुनियों की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने अयोध्या में महाराजा दशरथ के यहां श्रीराम के रूप में अवतार लिया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम केवल एक राजा नहीं, बल्कि मर्यादा, सत्य, त्याग, करुणा और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। उनका जीवन मानव समाज को परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य एवं समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कारों और आदर्शों को जीवन में उतारने का संदेश भी है।
जैसे ही कथा में भगवान श्रीराम जन्म का प्रसंग आया, पूरा सभागार “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु “भए प्रगट कृपाला दीन दयाला, कौशल्या हितकारी…” भजन पर भक्ति भाव से झूम उठे और भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की खुशियां उत्साहपूर्वक मनाईं।
हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के महामंडलेश्वर हंसराम जी उदासीन ने बाल स्वरूप भगवान श्रीराम का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माल्यार्पण कर पूजन किया। इसके साथ ही दशरथ के महलों में भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म का उल्लास भी मनाया गया। अयोध्यावासियों के मंगल गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने नृत्य कर आनंद व्यक्त किया। कथा व्यास ने रामनवमी के धार्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कथा स्थल को आकर्षक फूलों एवं रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था, जिसने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा में उपस्थित रहे। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इससे पूर्व प्रातःकाल आयोजित विष्णु यज्ञ में रघुनाथ चैहान एवं बंशीलाल हैंडरिया ने सपत्नीक आहुतियां दीं तथा सिद्धेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक किया। आश्रम परिसर में पंडित रोशन शास्त्री के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिदिन प्रातः 7 बजे विष्णु यज्ञ आयोजित हो रहा है। वहीं उपाचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा के मुखारविंद से सिद्धेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक संपन्न कराया जा रहा है। सायंकाल काशी की तर्ज पर भव्य गंगा आरती एवं 24 घंटे हरिनाम संकीर्तन से पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।