*ब्यूरो चीफ पुनित चपलोत*
भीलवाड़ा // जिले के गुरला टोल के पास स्थित नरसिंहपुरा गांव में एक खेत की पत्थर की दीवार में अजगर दिखाई देने से ग्रामीणों में हलचल मच गई। खेत मालिक रमेश कुमावत ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और वन्यजीव रक्षक मौके पर पहुंचे। रेस्क्यू के दौरान अजगर के साथ उसके अंडे भी मिले, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। वन विभाग ने अजगर और उसके अंडों को किसी तरह की क्षति पहुंचाए बिना सुरक्षित रेस्क्यू कर वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस दौरान ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया गया। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव को नुकसान न पहुंचाएं। यदि किसी क्षेत्र में अजगर या अन्य वन्यजीव दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें। वन्यजीव पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा ने बताया कि सूचना मिली कि गुरला टोल के पास स्थित नरसिंहपुरा गांव में रमेश कुमावत के खेत की पत्थर की दीवार में एक अजगर दिखाई दिया। तुरंत वन विभाग के वनपाल चंद्रपाल को सूचना दी। जिस पर वन रक्षक दिनेश कुमार रेगर और अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि अजगर दीवार के बीच सुरक्षित बैठा हुआ था। जब उसे सावधानीपूर्वक बाहर निकालने का प्रयास किया गया तो वहां अजगर के अंडे भी दिखाई दिए। इसके बाद वन विभाग की टीम ने पूरी सतर्कता के साथ अजगर और उसके अंडों का रेस्क्यू किया। रेस्क्यू अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि अजगर और उसके अंडों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। वन विभाग के रेंजर प्रशांत भट्ट के निर्देशानुसार अजगर और उसके अंडों को सुरक्षित रूप से वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। इस दौरान वन विभाग के दिनेश कुमार, वनरक्षक सोहनलाल, वनरक्षक योगेंद्र सिंह, वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा और उनकी टीम मौजूद रही।
वन विभाग के दिनेश कुमार ने बताया कि भारतीय रॉक पाइथन एक विशाल और विषहीन अजगर प्रजाति है, जिसकी लंबाई 20 फीट तक हो सकती है। यह प्रजाति भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित है। गर्मी के मौसम में मादा अजगर अंडे देती है और उनकी सुरक्षा करती है।
