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“ब्रह्म देश सू आईया, धर रामचरण नाम, भक्ति राज जमाय कै, फिर पहुँच्या वाही ठाम”


रामनिवास धाम में 25 परिवारों को राशन वितरण, सेवा-भक्ति का अद्भुत संगम
शाहपुरा | मूलचंद पेसवानी

आस्था, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम शुक्रवार को शाहपुरा स्थित रामनिवास धाम में देखने को मिला, जहां रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज के 228वें निर्वाण महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। पांच दिवसीय इस महोत्सव की शुरुआत राम नाम जप यज्ञ के साथ हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
महोत्सव के प्रथम दिन कार्यवाहक भंडारी संत नवनीध राम महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा—“ब्रह्म देश सू आईया, धर रामचरण जी नाम, भक्ति राज जमाय कै, फिर पहुँच्या वाही ठाम।”
इस दोहे के माध्यम से उन्होंने मानव जीवन के उद्देश्य और गुरु की महिमा को सरल भाषा में समझाया।

संत नवनीध राम महाराज ने गुरु और आचार्य के कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीव परमात्मा की अमूल्य संपत्ति है, जो अज्ञानवश भगवान से दूर हो जाता है। गुरु ही वह सेतु हैं, जो जीव को पुनः परमात्मा से जोड़ते हैं और उसे उनके चरणों में समर्पित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जब भगवान अपनी खोई हुई संपत्ति—अर्थात जीव—को वापस पाते हैं, तो वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
अपने प्रवचन में उन्होंने एक सुंदर उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जैसे किसी राजा के महल में सात परकोटे होते हैं और एक साधारण व्यक्ति को राजा के दर्शन के लिए हर परकोटे को पार करना पड़ता है, वैसे ही गुरु हमें एक-एक चरण से आगे बढ़ाते हुए अंततः भगवान के साक्षात्कार तक पहुंचाते हैं। जब अंतिम परकोटे में राजा के दर्शन हो जाते हैं, तब कोई संशय नहीं रहता—ठीक उसी प्रकार भगवान के साक्षात्कार के बाद सभी प्रश्न समाप्त हो जाते हैं।
महोत्सव के इस पावन अवसर पर सेवा का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया। संत नवनीध राम महाराज की प्रेरणा से शाहपुरा के समाजसेवी रामहेत धुमस द्वारा 25 जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री का वितरण किया गया। इस पुनीत कार्य के लिए रामनिवास धाम की ओर से धुमस परिवार का आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में सूर्यप्रकाश बिड़ला, कैलाश चंद्र तोषनीवाल, रामेश्वर लाल बसेर, दीनदयाल मारू, नारायण सिंह, राकेश सोमाणी सहित अनेक रामस्नेही भक्त उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर राम नाम का स्मरण करते हुए महोत्सव को भक्तिमय बना दिया।
गौरतलब है कि यह निर्वाण महोत्सव 3 अप्रैल से 7 अप्रैल 2026 तक विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों के साथ धूमधाम से मनाया जाएगा। आने वाले दिनों में भजन, सत्संग और विशेष अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु धर्मलाभ अर्जित करेंगे।

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