प्रतापपुरा ग्राम पंचायत में जंगली सूअरों के लगातार हमलों से स्थानीय किसानों को भारी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में रात्रि के समय सूअर खेतों में घुसकर खरीब की फ़सलें बुरी तरह तहस-नहस कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। प्रभावित किसानों का कहना है कि यदि त्वरित रोकथाम न की गई तो आर्थिक क्षति और बढ़ेगी।
समाजसेवी शंकरलाल गाडरी ने कहा कि उन्होंने इस समस्या के संबंध में कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को सूचित किया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है, लेकिन अभी तक ठोस राहत या बचाव उपकरण नहीं मिले हैं। गाडरी ने कृषि विभाग और वन विभाग से मिलकर प्रभावी कदम उठाने का अनुरोध किया है — विशेषकर पकड़ने के उपकरण, मानव-हितैषी दवाइयां/उपाय और तकनीकी सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने की माँग की है।

किसानों ने अधिकारियों से प्रभावित फसलों का आकलन कर क्षति का मुआवजा या फसल-बीमा सहायता देने की भी मांग की है। स्थानीय लोग आशा करते हैं कि सरकार और सम्बंधित विभागों द्वारा सतर्कता एवं बचाव के ठोस कदम उठाए जाएँ ताकि फसलों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस मसले पर अभी तक प्रशासन की आधिकारिक टिप्पणी प्राप्त नहीं हुई है। शाहपुरा तहसील में अल-नीनो के प्रभाव के कारण भी इस बार फसलों को अतिरिक्त जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, कम बारिश के कारण फसलों को सिंचाई का अतिरिक्त बोझ वहन कर रहे हैं, और लगभग तैयार फसलों को सुअर नष्ट कर रहे हैं।
