भाजपा-कांग्रेस ने अब तक नहीं खोले पत्ते, नामांकन के अंतिम दिन साफ होगी तस्वीर; चौराहों से थड़ियों तक चुनावी चर्चाओं का दौर
बिजौलिया – शुभम जैन । ग्राम पंचायत से नगर पालिका में क्रमोन्नत होने के बाद पहली बार हो रहे नगर पालिका चुनाव को लेकर बिजौलिया में सियासी बिसात तेजी से बिछने लगी है। चुनावी सरगर्मियां बढ़ने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता भी बढ़ गई है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अभी तक अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक नहीं की है। दोनों ही प्रमुख दल बगावत और भीतरघात की संभावनाओं को देखते हुए अपने पत्ते खोलने में सावधानी बरत रहे हैं। ऐसे में 31 अगस्त नामांकन के अंतिम दिन राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।
चुनावी माहौल अब कस्बे की गलियों से निकलकर चौराहों और थड़ियों तक पहुंच चुका है। सुबह की चाय से लेकर शाम की बैठकों तक वार्डवार समीकरण, संभावित प्रत्याशी, पार्टी टिकट और जीत-हार को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हर वार्ड में मतदाताओं के बीच अपने-अपने स्तर पर प्रत्याशियों को लेकर आकलन किया जा रहा है।
पुराने चेहरों की फिर सक्रियता, युवाओं ने भी ठोकी ताल
नगरपालिका चुनाव में इस बार पुराने राजनीतिक चेहरों की सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पूर्व ग्राम पंचायत व्यवस्था में वार्ड पंच, पार्षद अथवा सरपंच के रूप में सक्रिय रहे कई नेता एक बार फिर चुनावी मैदान में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ पुराने चेहरे लंबे राजनीतिक अनुभव और जनसंपर्क को अपनी ताकत मानकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, तो दूसरी ओर मतदाताओं का एक वर्ग बदलाव और नए चेहरों की मांग करता दिखाई दे रहा है।
इधर इस चुनाव में युवा और नई पीढ़ी के दावेदार भी पूरे जोश के साथ मैदान में उतरने को तैयार हैं। युवाओं का दावा है कि नगर पालिका के नए स्वरूप में वार्डों को नई सोच, सक्रियता और विकास की जरूरत है।
‘पैराशूट’ उम्मीदवारों की चर्चा ने बढ़ाई हलचल
टिकट वितरण को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उन संभावित उम्मीदवारों की है, जो स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सक्रिय नहीं रहे, लेकिन अंतिम समय में पार्टी के बड़े नेताओं के संपर्क और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे संभावित ‘पैराशूट उम्मीदवारों’ को लेकर स्थानीय दावेदारों में नाराजगी की सुगबुगाहट भी सुनाई दे रही है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि लंबे समय से वार्ड में मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को मौका मिलना चाहिए। वहीं पार्टियों के सामने भी चुनौती है कि वे जिताऊ उम्मीदवार के चयन के साथ-साथ टिकट से वंचित दावेदारों को कैसे साधती हैं, ताकि चुनाव में भीतरघात का खतरा कम किया जा सके।
पार्षद की दौड़ से ज्यादा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी पर नजर
नगरपालिका चुनाव में कुछ ऐसे राजनीतिक चेहरे भी सक्रिय हैं, जो सीधे तौर पर पार्षद की दावेदारी से ज्यादा नगरपालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी के समीकरण साधने में जुटे हुए बताए जा रहे हैं। ऐसे नेताओं की नजर अभी से संभावित बोर्ड गठन और बहुमत के आंकड़े पर टिकी हुई है।
चुनावी चर्चा में यह सवाल भी उठ रहा है कि कौन-कौन से प्रत्याशी जीतकर बोर्ड में पहुंचेंगे और किस दल के पास बहुमत आएगा। हालांकि इन सभी समीकरणों का फैसला आखिरकार मतदाता ही करेंगे।
पहला नगरपालिका चुनाव, मतदाताओं के सामने बड़ा मौका
बिजौलिया के नगरपालिका बनने के बाद यह पहला चुनाव है, इसलिए इसे लेकर आम मतदाताओं में भी खासा उत्साह है। लोगों को उम्मीद है कि नए नगरपालिका बोर्ड के गठन के बाद कस्बे में सड़क, नाली, सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, यातायात, अतिक्रमण और अन्य स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर ठोस काम होगा।
अब तक राजनीतिक दलों और दावेदारों की ओर से अपने-अपने समीकरण साधने का दौर चल रहा है, लेकिन चुनाव की असली तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगी। 31 अगस्त के बाद यह साफ होगा कि किस वार्ड में कौन आमने-सामने है और किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है।
फिलहाल बिजौलिया में चुनावी चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुराने अनुभवी चेहरों से लेकर युवा दावेदारों तक सभी अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
