राजनीतिक हस्तक्षेप और दबाव के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन, मुख्य बाजार में बारूद के बीच मंडरा रहा बड़ा हादसा , जिस दुकान में पहले आग लगी वहाँ जम गए अवैध पटाखे
भीलवाड़ा।
बिजोलिया में दीपावली की तैयारियों के बीच खुशियों पर बारूद की परत चढ़ गई है। राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही के बीच नगर का मुख्य बाजार विस्फोटक जाल में तब्दील हो चुका है। तेजाजी चौक से पंचायत चौक तक हर कदम पर पटाखा दुकानों का अवैध जमावड़ा दिखाई दे रहा है और ये सब प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है।
सब्जी मंडी की फल-फ्रूट की दुकानों से लेकर कपड़ों की दुकानों तक पटाखों की खुलेआम बिक्री जारी है। शनिवार को थानाधिकारी उगमाराम सैनी ने मुख्य बाजार का निरीक्षण भी किया, लेकिन फल की दुकान पर बारूद बिकते देखने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे साफ है कि प्रशासन अब नेताओं और व्यापारिक दबाव में पूरी तरह नतमस्तक नज़र आ रहा है।

जानकारी के अनुसार, कुछ पटाखा विक्रेताओं ने जनप्रतिनिधियों, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाकर मुख्य बाजार में अवैध दुकानों की अनुमति हासिल कर ली है। बताया जा रहा है कि हाल ही में एक मंदिर परिसर में हुई बैठक में एक पटाखा व्यवसाई (जो स्थानीय नेता भी है) ने तेजाजी चौक से पंचायत चौक तक की विद्युत व्यवस्था का जिम्मा दुकानदारों के जिम्मे लेने की बात रखी। इस प्रस्ताव के बाद बाजार में दुकानों की अनुमति मिल गई और नगर की सुरक्षा का सौदा मात्र 38 हजार रुपए की बिजली व्यवस्था के बदले कर दिया गया।
जिला कलेक्टर द्वारा नगर में अस्थाई पटाखा दुकानों के लिए छोटा खेल मैदान तय किया गया था। भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र में पटाखा दुकानों की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद रविवार को मुख्य बाजार में खुलेआम 50 टन से अधिक बारूद पहुंच चुका है और बिक्री जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी घनी आबादी और संकरी गलियों में विस्फोटक सामग्री रखना बेहद खतरनाक है। आग लगने की स्थिति में न तो आग बुझाने की जगह बचेगी, न लोगों के पास बचने का रास्ता रहेगा।

हाल ही में जैसलमेर में बस में लगी आग की घटना प्रशासन के लिए सबक बननी चाहिए थी, लेकिन बिजोलिया में न तो कोई आपात योजना बनी है और न ही सुरक्षा इंतजाम। यह लापरवाही किसी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।
जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने केवल 18 लाइसेंसधारकों को अनुमति दी थी, लेकिन उनकी आड़ में 40 से अधिक अवैध दुकानदारों ने पटाखे खरीद लिए हैं और तय सीमा से कहीं अधिक बारूद शहर में पहुँचा दिया गया है।
नगरवासियों का कहना है कि प्रशासन और नेताओं की मिलीभगत के कारण अब बाजार मौत के मुहाने पर खड़ा है। दीपावली की रोशनी के बीच बिजोलिया की गलियों में अब खतरे की चिनगारी सुलगने लगी है।
