हरी शेवा उदासीन आश्रम में निर्मला बाई की कथा संपन्न

BHILWARA
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कार्तिक मास में हुए विविध पाठ, पारायण व पूजन — 5 नवम्बर को मनाया जाएगा कार्तिक पूर्णिमा व बाबा शेवाराम साहब का मासिक प्राकट्य उत्सव

भीलवाड़ा, पेसवानी
हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पावन कार्तिक मास के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रसिद्ध निर्मला बाई की कथा का शुभारम्भ 3 नवम्बर को हुआ, जिसका समापन एवं भोग 4 नवम्बर मंगलवार को विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुआ।

आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने इस अवसर पर संगीतमय कथा प्रस्तुत करते हुए भक्तों को आध्यात्मिक प्रवचन दिए। उन्होंने निर्मला बाई के जीवन से प्रेरणा लेते हुए भक्ति, सेवा और समर्पण की महत्ता पर प्रकाश डाला। कथा के दौरान संत मयाराम, संत राजाराम, ब्रह्मचारी बालक सिद्धार्थ, इंद्रदेव, कुणाल और मिहिर ने भी भजनों के माध्यम से भक्ति रस का संचार किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक आनंद से भर गया।

स्वामी हंसराम उदासीन ने बताया कि निर्मला बाई कथा का आयोजन पूज्य बाबा शेवाराम साहब के समय से ही प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास में होता आया है। इस कथा श्रवण की विशेष मान्यता है। कहा जाता है कि इस अवधि में पांच मक्की की रोटियां एवं हरे साग का भोग लगाने से जीव के सभी कष्टों का निवारण होता है। यह दो दिवसीय कथा कार्तिक पूर्णिमा से पूर्व संपन्न होती है, जिसमें श्रद्धालु अत्यंत भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करते हैं।

उन्होंने आगे बताया कि कार्तिक मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र एवं शुभ माना गया है। यह माह भगवान विष्णु की उपासना का विशेष समय होता है। चातुर्मास का यह अंतिम माह होता है, जिसमें देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। दीपावली, गोवर्धन पूजा, गोपाष्टमी, आंवला नवमी तथा देवउठनी एकादशी जैसे महत्वपूर्ण पर्व इसी माह में आते हैं। साथ ही इस अवधि में दीपदान, तुलसी पूजा तथा पवित्र नदियों में स्नान का भी अत्यधिक धार्मिक महत्व है।

आश्रम के संत गोविंदराम ने बताया कि संपूर्ण कार्तिक मास के दौरान प्रतिदिन हवन, पूजन, ठाकुर जी का दुग्धाभिषेक, श्री हरिसिद्धेश्वर मंदिर में अभिषेक और पाठ पारायण संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ कल्प वृक्ष, आंवला, कदम्ब, शमी, बेल पत्र, बड़, पीपल और तुलसी के पौधों का पूजन किया। वृक्ष पूजन की यह परंपरा सनातन धर्म की पर्यावरण संरक्षण के प्रति आस्था और संवेदना का प्रतीक है, जिसे आश्रम में वर्षों से नियमित रूप से निभाया जा रहा है।

आश्रम में गोपाष्टमी, आंवला नवमी और देवउठनी एकादशी जैसे पर्व भी पूरे भक्तिभाव से मनाए गए। श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में धार्मिक आचरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

आगामी 5 नवम्बर, बुधवार को कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर आश्रम परिसर में दीपदान महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दिन कार्तिक महात्म्य कथा का समापन भोग के साथ किया जाएगा। साथ ही सतगुरु बाबा शेवाराम साहब के मासिक प्राकट्य उत्सव के उपलक्ष में भव्य सत्संग और प्रवचन आयोजित किए जाएंगे।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में शाम के समय आश्रम को आकर्षक रोशनी और पुष्प सजावट से सजाया जाएगा। आरती और प्रार्थना के पश्चात भक्तजनों को महाप्रसादी वितरित की जाएगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

कार्तिक पूर्णिमा का यह पावन पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आश्रम की आध्यात्मिक परंपरा और समाज में भक्ति भावना को प्रगाढ़ करने का माध्यम भी है। आश्रम परिवार ने सभी श्रद्धालुओं से इस पावन आयोजन में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ लेने का आह्वान किया है।