शक्करगढ़। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पाँचवें दिन शनिवार को शक्करगढ़ स्थित कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की अनुपम भीड़ उमड़ पड़ी। पावन मंच से महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी जगदीश पुरी जी महाराज के दिव्य, प्रेरक और ज्ञानमय प्रवचनों ने पूरे वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।

स्वामी जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने का शुद्धतम मार्ग दिखाती है। पाँचवें दिन के विविध प्रसंगों के माध्यम से भक्तों को ज्ञान, भक्ति और आचरण की गहराई से परिचय कराया गया।
गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग पर उन्होंने बताया कि जब भक्त का मन पूर्णतः प्रभु में समर्पित हो जाता है, तब ईश्वर स्वयं उसका उद्धार करने प्रकट होते हैं। समुद्र मंथन को जीवन का गहरा संदेश बताते हुए कहा कि हर मनुष्य के भीतर देवत्व और दैत्यत्व दोनों हैं—सफल वही होता है जो धैर्य और सद्गुणों के साथ चलता है।
वामन भगवान की लीला का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने कहा कि अहंकार से बड़ा कोई शत्रु नहीं होता। वामनावतार हमें सिखाता है कि छोटे बनकर भी बड़े कार्य किए जा सकते हैं।
गंगावतरण प्रसंग में उन्होंने गंगा मैया की पवित्रता और करुणा का वर्णन करते हुए कहा कि गंगा के प्रत्येक जलकण में मोक्ष का मार्ग छिपा है। वहीं रामावतार के माध्यम से उन्होंने बताया कि श्रीराम का जीवन सत्य, धर्म और मर्यादा का जीवंत पथप्रदर्शन है।

जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म और नन्दोत्सव का वर्णन प्रारम्भ हुआ, पूरा पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं की खुशी, उत्साह और भक्ति चरम पर पहुँच गई। हर ओर नन्दोत्सव की दिव्य उमंग छा गई।
इस अवसर पर आश्रम के ब्रह्मचारी नारायण चैतन्य एवं गायक चंद्र मोहन शर्मा द्वारा प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। कथा में केकड़ी, देवली, जहाजपुर, शाहपुरा, भीलवाड़ा, कोटा, जोधपुर, ब्यावर, विजयनगर, सावर सहित अनेक दूरस्थ क्षेत्रों से श्रद्धालु महिला-पुरुष बड़ी संख्या में शामिल हुए।
