भीलवाड़ा में गौवंश के साथ कुकृत्य का आरोपी 2 हजार किमी पीछा कर बिहार से गिरफ्तार

BHILWARA
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20 हजार का इनामी आरोपी, पहले भी कर चुका था ऐसी वारदात, 1500 CCTV खंगालकर पुलिस ने की पहचान, ट्रेनों में करता था आवाजाही

भीलवाड़ा। शहर में गौवंश के साथ घिनौना कृत्य करने वाले 20 हजार रुपए के इनामी आरोपी को पुलिस ने करीब 2 हजार किलोमीटर तक पीछा कर बिहार-बांग्लादेश बॉर्डर के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पहले भी भीमगंज थाना क्षेत्र में इसी तरह की वारदात को अंजाम दे चुका था।

जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन में मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमें गठित की गई थीं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारस जैन के सुपरविजन और वृताधिकारी सज्जन सिंह राठौड़ के नेतृत्व में तीन अलग-अलग टीमें बनाई गईं।

29 मार्च को शिवराज गुर्जर ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दी थी कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक अज्ञात व्यक्ति गाय के साथ कुकृत्य करता दिखाई दे रहा है। घटना 27 मार्च के आसपास की बताई गई। वीडियो सामने आने के बाद शहर सहित पूरे हिंदू समाज में भारी रोष फैल गया।

इस पर पुलिस ने राजस्थान गोवंशीय पशु अधिनियम 1995 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस टीमों ने घटनास्थल से लेकर शहर के विभिन्न इलाकों, दुकानों, रेलवे स्टेशन और अभय कमांड सेंटर के करीब 1500 CCTV कैमरों की जांच की। इससे आरोपी की पहचान कर उसकी फोटो और वीडियो राज्य व देशभर के पुलिस नेटवर्क में साझा किए गए।

जांच में सामने आया कि आरोपी ट्रेन से भीलवाड़ा आता और वारदात कर वापस ट्रेन से फरार हो जाता था। इसके बाद टीमों को विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर तैनात किया गया और रोजाना आने-जाने वाली करीब 40 ट्रेनों की बारीकी से जांच की गई।

पुलिस ने भीलवाड़ा से लेकर अजमेर, जयपुर, जोधपुर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर और आसनसोल सहित कई रेलवे स्टेशनों के CCTV फुटेज खंगाले। जांच में पता चला कि आरोपी बिहार के किशनगंज की ओर गया है।

सूचना के आधार पर आरपीएफ के सहयोग से आरोपी को किशनगंज रेलवे स्टेशन (बिहार) से डिटेन कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान संजय कुमार साहू (56) निवासी शास्त्रीनगर, थाना कदमा, जिला पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर, झारखंड) के रूप में हुई है।

पूरे ऑपरेशन में कोतवाली थाना, भीमगंज थाना, साइबर सेल और आरपीएफ की संयुक्त टीमों ने अहम भूमिका निभाई। लगातार निगरानी, तकनीकी विश्लेषण और समन्वय के चलते पुलिस को बड़ी सफलता मिली।