जंगल, तपस्या और रहस्यमयी अनुभवों ने बदला जीवन, शाहपुरा में भव्य स्वागत
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
नर्मदा मैया की 3600 किलोमीटर लंबी और आध्यात्मिक रहस्यों से भरी परिक्रमा पूर्ण कर लौटे जगदीश शर्मा शिवपुरी वाले का शहर में जोरदार स्वागत किया गया। डाक बंगला परिसर में उनके पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। सामाजिक संगठनों, अनुयायियों और जनप्रतिनिधियों ने साफा बंधवाकर, शॉल व उपरणा ओढ़ाकर सम्मान किया और आशीर्वाद लिया।

अभिनंदन समारोह का आयोजन एडवोकेट दीपक पारीक, सुनील सुखवाल, सुधीर झंवर व विक्रांत के निर्देशन में हुआ, जबकि संचालन गीतकार सत्येंद्र मंडेला ने किया। मंडेला ने काव्य के माध्यम से कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जगदीश शर्मा के तप और साधना पर प्रकाश डाला।
जगदीश शर्मा ने बताया कि यह उनकी तीसरी नर्मदा परिक्रमा थी, जो करीब 67 दिनों में पूर्ण हुई। इस दौरान उन्होंने घने जंगलों, सुनसान रास्तों और सीमित संसाधनों के बीच यात्रा की। कई बार ऐसे हालात बने जब रास्ता भटकने की स्थिति आई, लेकिन “नर्मदे हर” के स्मरण से मार्ग मिलता गया। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में मिले सहयोग को नर्मदा मैया की कृपा बताया।
उन्होंने नर्मदा परिक्रमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का माध्यम है। नर्मदा पुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि नर्मदा के दर्शन मात्र से पुण्य प्राप्त होता है और परिक्रमा करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
परिक्रमा के अंतिम चरण में ओंकारेश्वर पहुंचकर जल अर्पण, परिक्रमा और कन्या पूजन के साथ अक्षय तृतीया पर यात्रा पूर्ण की। उन्होंने सभी से जीवन में एक बार नर्मदा परिक्रमा या कम से कम दर्शन करने का आह्वान किया।
इस मौके पर कदमा महोदव ट्रस्ट के रतनलाल झंवर, गोविंद सिंह राणावत, शिव झंवर, संचिना कला संस्थान के अध्यक्ष रामप्रसाद पारीक, नगर भाजपा अध्यक्ष पंकज सुगंधी, गीतकार सत्येंद्र मंडेला, सुरेश मूंदड़ा, सुनील सुखवाल, पीयुष गदिया, घनश्याम सिंह राणावत, बजरंगसिंह राणावत, डाबला चांदा के अजय प्रताप सिंह राणावत, सुधीर झंवर, सत्यकाम जोशी, प्रेस क्लब के मूलचन्द पेसवानी, सुर्यप्रकाश आर्य, गणेश सुगंधी सहित विभिन्न प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान “नर्मदे हर” के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा।
