जाजम पर बैठे जिला कलेक्टर, दिल जीत गया गांव!

BHILWARA
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नई आरणी में ‘ग्रामीण रथ’ को मिली रफ्तार, योजनाएं अब घर-घर तक
संधू की सादगी बनी मिसाल, अफसर-जनता की दूरी हुई कम
समस्याएं सुनीं, मौके पर ही दिए समाधान के सख्त निर्देश

शाहपुरा -मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा क्षेत्र के नई आरणी गांव में उस वक्त अलग ही नजारा देखने को मिला, जब जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने अपनी सादगी और संवेदनशीलता से ग्रामीणों का दिल जीत लिया। आमतौर पर कुर्सियों और मंचों पर नजर आने वाले अफसर, यहां जाजम पर बैठकर सीधे ग्रामीणों से रूबरू हुए और यही पहल पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा बन गई।
दरअसल, कलेक्टर संधू राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए चल रहे ग्रामीण रथ अभियान को गति देने नई आरणी पहुंचे थे। उन्होंने विधिवत हरी झंडी दिखाकर रथ को तय रूट पर रवाना किया और रथ चालक का माल्यार्पण कर स्वागत भी किया। लेकिन असली तस्वीर तब बनी, जब कलेक्टर खुद जाजम पर बैठ गए उन्हें देख अन्य अधिकारी भी वहीं बैठ गए और माहौल पूरी तरह से जनसंवाद का बन गया।


ग्रामीणों ने भी इस पहल को हाथों-हाथ लिया। कई लोगों ने कहा“अफसर ऐसे भी होते हैं, जो हमारे बीच बैठकर हमारी बात सुनते हैं।” कलेक्टर की यह सादगी और सहजता गांव में चर्चा का विषय बन गई।
अपने संबोधन में कलेक्टर संधू ने कहा कि ग्रामीण रथ अभियान का मकसद सरकार की योजनाओं की जानकारी अंतिम छोर तक बैठे व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़ें और योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं।
इस दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए उनकी समस्याएं भी सुनीं। गांववासियों ने अतिक्रमण, खराब सड़कों और पेयजल संकट जैसी मूलभूत समस्याएं सामने रखीं। कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाए। इतना ही नहीं, उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि क्षेत्र में चल रही योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि पात्र लोगों को समय पर लाभ मिल सके और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त न हो।
कार्यक्रम में शाहपुरा उपखंड अधिकारी सुनील मीणा, तहसीलदार भींवराज परिहार, विकास अधिकारी प्रकाश स्वर्णकार सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। नई आरणी में कलेक्टर संधू की जाजम पर बैठकर संवाद करने की पहल ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने का मजबूत संदेश दिया है और यही असली ‘सुशासन’ की तस्वीर भी है।