भीलवाड़ा में 17 राज्यों के 1120 किसान जुटे, गौ आधारित प्राकृतिक खेती पर होगा मंथन
कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने जैविक खेती को बताया भविष्य का रास्ता
भीलवाडा, मूलचन्द पेसवानी
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं कृषि विश्वविद्यालय कोटा के सहयोग से श्रीरामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, सरोज देवी फाउण्डेशन, अमृता देवी पर्यावरण नागरिक संस्थान तथा फाउण्डेशन फॉर इकोलॅाजीकल सिक्युरिटी के संयुक्त तत्वावधान में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ रीको औद्योगिक क्षेत्र स्थित आरसीएम वल्र्ड में हुआ।

यह प्रशिक्षण 27 मई से 31 मई 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम समन्वयक महेश चन्द्र नवहाल ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ अतिथियों द्वारा तुलसी के गमले में जल अर्पित कर किया गया। उद्घाटन सत्र में कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति डॉ प्रताप धाकड़ एवं कृषि विश्वविद्यालय कोटा के कुलपति डॉ विमला डुकवाल, भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी, जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु, गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक ताराचंद गोयल, आरसीएम के निदेशक तिलोक छाबड़ा, अपना संस्थान के विनोद मेलाना मंचासीन रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. प्रताप सिंह धाकड़ ने कहा कि 1950 के दशक में देश की कृषि व्यवस्था कमजोर थी, जिसके समाधान के लिए हरित क्रांति लाई गई। हालांकि समय के साथ कृषि रसायनों पर बढ़ती निर्भरता ने कई नई समस्याओं को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की बढ़ती घटनाएं रासायनिक खेती के दुष्परिणामों की ओर संकेत करती हैं। ऐसे में गौ आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती ही भविष्य का सुरक्षित विकल्प बन सकती है।
इस अवसर पर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और श्रीरामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के बीच एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए। कृषि विश्वविद्यालय कोटा की कुलपति डॉ. विमला डुकवाल ने कहा कि जैविक खेती के विस्तार के लिए चलाया जा रहा “सुविचार अभियान” सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि विषयुक्त खाद्यान्न आज मातृशक्ति और समाज के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। भारतीय कृषि परंपरा में बीज उपचार, भूमि पूजन और प्रकृति के सम्मान की जो परंपराएं थीं, उन्हें पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधु ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान जैविक खेती ही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी प्राकृतिक खेती को बड़े मिशन के रूप में आगे बढ़ा रही है।
भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने कहा कि गौ माता आधारित कृषि व्यवस्था किसानों को बेहतर पोषण, अच्छा स्वास्थ्य और सकारात्मक विचार प्रदान करेगी। उन्होंने प्रत्येक किसान को जैविक एवं प्राकृतिक खेती से जोड़ने का आह्वान किया।
आरसीएम के निदेशक तिलोकचंद छाबड़ा ने कहा कि “सुविचार अभियान” के माध्यम से हर गांव तक जैविक खेती की अवधारणा पहुंचाने और किसानों से सतत संवाद बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और किसानों को समय पर तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक ताराचंद गोयल ने कहा कि जैविक खेती तभी व्यापक रूप से सफल होगी जब इससे किसानों की आय बढ़ेगी और खेती की लागत घटेगी। उन्होंने लागत कम करने वाली तकनीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
अपना संस्थान के सचिव विनोद मेलाना ने “सुविचार अभियान” की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक अभियान के माध्यम से व्यापक स्तर पर किसानों को जैविक खेती से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में देशभर के 17 राज्यों से कुल 1120 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। सभी प्रतिभागी पांच दिनों तक गौ आधारित कृषि की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे तथा विभिन्न विषयों पर प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के प्रथम दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पवन टांक ने जैविक खेती की समग्र अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मिट्टी की संरचना, जल संरक्षण, बीज चयन, खेत की बनावट और पोषण वाटिका की योजना जैसे विषयों पर किसानों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि एक बीघा खेत की सुनियोजित आहार वाटिका से पूरे वर्ष परिवार के लिए अनाज, दाल, तेल, सब्जियां और फल प्राप्त किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ किसान कार्यकर्ताओं तस्वीर देवी, कानाराम भुंवाल, राजेश कुवाड़ एवं राजेश जाखड़ का सम्मान भी किया गया।
