BHILWARA

बारात की तरह हुआ स्वागत, छप्पन भोग परोसे, असहायों की सेवा करने वाले राजभाई को किया सम्मानित


शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
निकटवर्ती सावर कस्बे में संचालित सोशल मीडिया आश्रम के संचालक राजभाई और उनके आश्रम में रहने वाले प्रभुओं (सेवाग्राहीजनों) का शाहपुरा में अनूठे अंदाज में स्वागत किया गया। समाजसेवियों और युवाओं ने उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित कर सम्मान समारोह आयोजित किया, जहां बारात की तरह स्वागत, आनंदोत्सव, सामूहिक भोजन और छप्पन भोग का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम में आश्रम के प्रभुओं और स्वयंसेवकों का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। इस दौरान युवाओं ने उनके साथ नृत्य कर खुशियां साझा कीं। आयोजन का सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब स्वयंसेवकों ने प्रभुओं को अपने हाथों से भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर भोजन किया। उपस्थित लोगों ने इसे मानवता और सेवा का अद्भुत उदाहरण बताया।
राजभाई पिछले कई वर्षों से बेघर, मानसिक रूप से विक्षिप्त, लावारिस और असहाय लोगों की सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनके मन में सेवा का भाव था। परिवार चाहता था कि वे पढ़-लिखकर नौकरी करें, लेकिन उन्होंने जरूरतमंद लोगों की सेवा का मार्ग चुना। शुरुआत में संसाधनों की कमी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने संकल्प को कमजोर नहीं होने दिया।
दो वर्ष पूर्व उन्होंने परिवार की दो बीघा जमीन पर आश्रय स्थल विकसित करने का कार्य शुरू किया। आज वहां 90 से अधिक असहाय लोग रह रहे हैं, जिनके भोजन, चिकित्सा और देखभाल की जिम्मेदारी आश्रम उठा रहा है। करीब दस स्वयंसेवक दिन-रात उनकी सेवा में जुटे रहते हैं।
राजभाई ने बताया कि सोशल मीडिया उनके मिशन का सबसे बड़ा आधार बना है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य माध्यमों से न केवल जरूरतमंद लोगों की पहचान होती है, बल्कि उनके बिछड़े परिजनों को खोजने में भी मदद मिलती है। कई लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया जा चुका है। संस्था पूरी तरह जनसहयोग और दान पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि संस्था का पंजीयन हुए अभी तीन वर्ष पूरे नहीं हुए हैं, इसलिए सरकारी सहायता प्राप्त करने में कुछ प्रक्रियात्मक बाधाएं हैं। इसके बावजूद सेवा कार्य लगातार जारी है। बढ़ती संख्या के कारण आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं, लेकिन समाज से मिल रहे सहयोग और विश्वास से हौसला बना हुआ है।

राजभाई का कहना है कि आश्रम में रहने वाले सभी लोग उनके लिए प्रभु के समान हैं। उनकी सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। उन्होंने समाज के भामाशाहों, दानदाताओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से इस मानवीय अभियान में सहयोग की अपील की, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंदों को सम्मानजनक जीवन मिल सके। उल्लेखनीय है कि मानवता और सेवा के इस अनूठे आयोजन ने यह संदेश दिया कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जो निस्वार्थ भाव से दूसरों के जीवन में खुशियां और सम्मान लौटाने का कार्य कर रहे हैं।

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