– महेश वाटिका में जारी सप्त दिवसीय कथा के तीसरे दिन ध्रुव की अटूट भक्ति और कपिल ज्ञान का हुआ भावपूर्ण वर्णन
– रांदड़ परिवार के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब
भीलवाड़ा 04 जून। महेश वाटिका में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के तृतीय दिवस श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास संत कृपाराम महाराज ने श्रीमद्भागवत के विविध प्रसंगों का भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया

।पूरणमल-सम्पत देवी रांदड़ परिवार के तत्वावधान में चल रही
कथा के प्रारंभ में संत ने सुखदेव जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा सुनाने के प्रसंग का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को ईश्वर से जोड़ने वाला एक दिव्य मार्ग है। भगवान की कथा का श्रवण मनुष्य को सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्त कर आत्मिक शांति प्रदान करता है। कथा के दौरान द्रौपदी चीरहरण प्रसंग का उल्लेख करते हुए संत ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

उन्होंने भावुक कर देने वाले अंदाज में कहा, भक्त जैसे भजता है, वैसे ही मैं आता हूं।”* उन्होंने श्रद्धालुओं को सीख दी कि कण-कण में भगवान का वास है। जो व्यक्ति केवल दूसरों पर आश्रित रहता है, वह ईश्वर की विशेष कृपा से वंचित रह जाता है। इसलिए भगवान की भक्ति सदैव अनन्य और निष्काम होनी चाहिए। इसके पश्चात महाराजश्री ने महात्मा विदुर के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा संत और भक्त सदैव धर्म एवं सत्य के मार्ग पर चलता है। विदुर जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म का साथ नहीं छोड़ा और अपने आचरण से समाज को आदर्श जीवन का संदेश दिया। कर्दम ऋषि एवं देवहूति के प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन भी साधना का श्रेष्ठ माध्यम बन सकता है, बशर्ते उसमें त्याग, संयम और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव हो। कर्दम ऋषि के तप एवं देवहूति की सेवा भावना से प्रसन्न होकर ही भगवान ने उनके यहां अवतार लिया था।संत ने आगे भगवान कपिलदेव के अवतार एवं उनके द्वारा माता देवहूति को प्रदान किए गए सांख्य ज्ञान का सुंदर विवेचन किया। उन्होंने बताया कि सांख्य दर्शन मनुष्य को आत्मा और शरीर के भेद का ज्ञान कराता है तथा जीवन के वास्तविक उद्देश्य की ओर प्रेरित करता है। भगवान कपिल ने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग सुलभ बताया। भक्त ध्रुव के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए महाराजश्री ने कहा कि ध्रुव ने बाल्यावस्था में ही अपमान और प्रतिकूल परिस्थितियों को ठेस मानने के बजाय भगवान की भक्ति का माध्यम बना लिया। देवर्षि नारद जी के मार्गदर्शन में उन्होंने ऐसी कठोर तपस्या की कि भगवान विष्णु को प्रसन्न होना पड़ा और उन्हें ब्रह्मांड में अटल पद प्राप्त हुआ। दृढ़ संकल्प, श्रद्धा और भगवान के प्रति अटूट विश्वास से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। ध्रुव चरित्र प्रत्येक व्यक्ति को संघर्षों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान बीच-बीच में हुए भजनों एवं संगीतमय प्रस्तुतियों पर पूरा पंडाल भावविभोर होकर नाच उठा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। आयोजन समिति के मनोज सोनी एवं महेन्द्र सोनी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव आगामी 8 जून तक प्रतिदिन प्रातः 9:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक महेश वाटिका में आयोजित होगा। उन्होंने भीलवाड़ा के अधिकाधिक धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की भावभीनी अपील की है।
