नई शिक्षा नीति के ‘ब्रांड एंबेसडर’ बन रहे प्रशांत चौधरी, ‘हमारा राजस्थान’ के लेखक से पीएम ई-विद्या विशेषज्ञ तक का प्रेरक सफर

BHILWARA
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होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, डिजिटल शिक्षा और शोध के दम पर बनाई राज्य स्तरीय पहचान, शिक्षा जगत में बढ़ाया भीलवाड़ा का मान
शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी
बदलते दौर में जब राजस्थान सरकार शिक्षा व्यवस्था को तकनीक, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है, तब भीलवाड़ा जिले के फूलियाकलां स्थित श्री कल्याण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के भूगोल व्याख्याता प्रशांत चौधरी शिक्षा जगत में एक नई पहचान बनकर उभरे हैं। पाठ्यपुस्तक लेखन से लेकर डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, शोध और राज्य स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली तक उनका योगदान उन्हें प्रदेश के अग्रणी शिक्षकों की श्रेणी में स्थापित कर रहा है।

हाल ही में वर्ष 2026 में प्रकाशित कक्षा 7 की पाठ्यपुस्तक “हमारा राजस्थान” के लेखन कार्य में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका ने उन्हें नई पहचान दिलाई है। विद्यार्थियों के लिए सरल, रोचक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में उनके योगदान को शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा सराहा जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम है, बल्कि भीलवाड़ा जिले के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।

प्रशांत चौधरी वर्तमान में राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) के अंतर्गत संचालित असेसमेंट सेल में जिला संदर्भ समूह (डीआरजी) सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के विकास, प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने, प्रश्न बैंक निर्माण, अधिगम निष्पत्तियों पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने तथा राज्य स्तरीय असेसमेंट पोर्टल के लिए शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों के समग्र विकास पर आधारित यह कार्य शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

डाइट शाहपुरा, भीलवाड़ा के एजुकेशन टेक्नोलॉजी सेल से जुड़े प्रशांत चौधरी जिले के शिक्षकों को डिजिटल शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ई-कंटेंट निर्माण तथा आईसीटी आधारित शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं। विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और संगोष्ठियों में उन्हें नियमित रूप से रिसोर्स पर्सन और विशेषज्ञ वक्ता के रूप में आमंत्रित किया जाता है। उनके प्रशिक्षण से अनेक शिक्षक आधुनिक तकनीकों को कक्षा शिक्षण में प्रभावी रूप से शामिल कर रहे हैं।

शोध के क्षेत्र में भी उनका योगदान लगातार उल्लेखनीय रहा है। वे प्रतिवर्ष क्रियात्मक शोध और जिला स्तरीय शोध परियोजनाओं से जुड़े रहते हैं तथा डाइट की शैक्षिक एवं शोध पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेखन करते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, नवाचार और व्यवहारिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना उनके कार्य का प्रमुख उद्देश्य रहा है।

उनकी विषय विशेषज्ञता और शैक्षणिक दक्षता को देखते हुए हाल ही में आरएससीईआरटी अजमेर के एजुकेशन टेक्नोलॉजी सेल ने उन्हें पीएम ई-विद्या चैनल के लिए कक्षा 11 एवं 12 के भूगोल विषय के पाठों की स्टूडियो रिकॉर्डिंग हेतु आमंत्रित किया। इन डिजिटल पाठों के माध्यम से राजस्थान के लाखों विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचने का मार्ग और मजबूत होगा। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभाओं को आगे लाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास हो रहे हैं।

शिक्षा विभाग द्वारा उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए उन्हें विभिन्न अवसरों पर ब्लॉक एवं राज्य स्तरीय सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। पाठ्यपुस्तक लेखन, शिक्षक प्रशिक्षण, शोध, मूल्यांकन और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में उनका सतत योगदान आज अनेक शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

शिक्षा के माध्यम से नवाचार और गुणवत्ता का संदेश देने वाले प्रशांत चौधरी की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भीलवाड़ा और राजस्थान की शैक्षणिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला एक प्रेरक उदाहरण बनती जा रही है।