*ब्यूरो चीफ पुनित चपलोत*
भीलवाड़ा // जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन के बैनर तले मंत्रालयिक कर्मचारियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। वहीं, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो कर्मचारियों द्वारा जयपुर के जलमहल में जलसमाधि ली जाएगी।
पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार वैष्णव ने कहा कि संपूर्ण राजस्थान में प्रदेशव्यापी आह्वान पर जिला मुख्यालय पर यह विरोध प्रदर्शन किया गया है। इस दौरान दिए गए ज्ञापन में प्रमुख रूप से यह मांग की गई है कि पिछले दो वर्षों से पंचायती राज विभाग द्वारा प्रदेश के 16,000 मंत्रालयिक कर्मचारियों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। मंत्रालयिक संवर्ग की नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत पर आधारित मांगों को कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 की जांच के नाम पर जानबूझकर लंबित रखा गया है।
संगठन का आरोप है कि पंचायती राज विभाग द्वारा एक ही भर्ती की अलग-अलग स्तर पर जांच करवाना और मुख्य जांच अधिकारी को मंत्रालयिक कर्मचारियों के मामलों से पृथक करने की मांग को दरकिनार कर, गलत तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करवाना विभागीय मिलीभगत का साक्ष्य है। इससे सीधे तौर पर मंत्रालयिक कर्मचारियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। संगठन द्वारा इस मिलीभगत के साक्ष्य समय-समय पर विभाग के समक्ष प्रस्तुत किए जाते रहे हैं और आगे भी किए जाएंगे।
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया, “हम मांग करते हैं कि जांच के नाम पर संगठन की मांगों को दरकिनार न किया जाए। यदि हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो हम प्रदेशव्यापी आह्वान पर जयपुर मुख्यालय का घेराव करेंगे। इसके बावजूद यदि समाधान नहीं हुआ, तो सभी कर्मचारी जयपुर के जलमहल में जलसमाधि लेने को मजबूर होंगे।”
