बेटियां दो कुलों को तारती हैं, बेटे एक कुल को – डॉ. मिथिलेश नागर

BHILWARA
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गंगापुर( मुकेश गुर्जर)में आयोजित सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर परम पूज्य गुरुदेव डॉ. पंडित मिथिलेश  नागर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कन्या के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “बेटियां दो-दो कुलों को तारती हैं, जबकि बेटे एक कुल को तारते हैं।” उन्होंने भगवान कपिलदेव अवतार के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि नौ कन्याओं के पश्चात भगवान कपिल ने अवतार लिया, जिससे समाज में कन्याओं की महत्ता का स्पष्ट संदेश मिलता है।


डॉ. नागर ने कहा कि वर्तमान समय में कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक बुराई बढ़ रही है। जन्म से पूर्व ही बेटियों की हत्या करना अत्यंत घोर पाप है। बेटियां माता लक्ष्मी, माता सरस्वती एवं देवी शक्ति का स्वरूप हैं। उनके सम्मान और संरक्षण से ही समाज का संतुलित विकास संभव है। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या से स्वयं भगवान भी रुष्ट होते हैं।
कथा के दौरान नरसिंह अवतार का प्रसंग सुनाते हुए गुरुदेव ने बताया कि परमात्मा कण-कण में विद्यमान हैं। पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, वायु तथा समस्त सृष्टि में भगवान का वास है। श्रद्धा और विश्वास के साथ ईश्वर को हर स्थान पर अनुभव किया जा सकता है।
वामन अवतार की कथा के माध्यम से उन्होंने दान की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि राजा बलि यह जानते हुए भी कि वामन रूप में स्वयं भगवान विष्णु आए हैं, दान देने से पीछे नहीं हटे। दान धर्म का मूल आधार है और समस्त धार्मिक एवं लोककल्याणकारी कार्य दान के माध्यम से ही संपन्न होते हैं।
प्रार्थना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. नागर ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन चार से छह मिनट प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए। प्रार्थना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा मानसिक शांति एवं आत्मबल प्राप्त होता है।
कथा में आसपास के गांवों एवं क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर धर्मलाभ अर्जित किया। आयोजन समिति के छोटूलाल माली ने बताया कि शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की भव्य एवं मनोहारी कथा का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण करने का आग्रह किया। :::